भारतीय संस्कृति आध्यात्मिकता व भौतिकता का अद्भुत समन्वय:-प्राचार्य
कोयलांचल स्थित सरस्वती विद्या मंदिर,रजरप्पा में बुधवार को संस्कृति ज्ञान महाअभियान पखवाड़ा की शुरुआत की गई। इस मौके पर प्राचार्य उमेश प्रसाद एवं प्रभारी सह राँची विभाग के संस्कृति बोध के सह-संयोजक मिथिलेश कुमार खन्ना ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की।
इस महाअभियान का उद्देश्य भारतीय संस्कृति से समाज के प्रत्येक लोगों को जोड़ना है।इस अभियान के तहत समाज के लोगो को विद्यालय संपर्क टोली के माध्यम से जोड़ा जाएगा।जिसमे प्रत्येक आचार्य अभिभावक प्रतिनिधि,पूर्व छात्र,समिति व गणमान्य लोगों के सहयोग के माध्यम से समाज के लोग वृहत रूप से जुड़ेंगे।उनसभी को संस्कृति बोध परियोजना से अवगत कराया जाएगा।
मिथिलेश कुमार खन्ना ने इस अभियान का प्रस्तावना रखते हुए कहा कि कि यह महाअभियान 16 जुलाई से 30 जुलाई तक चलेगा। पूर्वजों के जमाने से जो रीति -रिवाज समाज में प्रचलित थे, उसे जानना होगा तभी हम भारतवर्ष को पुनः सिरमौर बना सकते हैं। पुराण आदि धर्म ग्रंथ इस बात के प्रमाण हैं कि यदि संसार में सभ्यता संस्कृति विकसित हुई तो भारतवर्ष से ही हुई हैं।
इस अवसर पर प्राचार्य उमेश प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा इस अभियान का उद्देश्य भारतीय संस्कृति का अलख जगाना तथा विश्व में भारतीय संस्कृति की विशेषताओं को बताना है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक धरोहर के रूप में वेद, पुराण, महाभारत, रामायण, रामचरितमानस के साथ हमारे पुराने रीति रिवाज भी हैं जो हमें हमारी विशिष्ट संस्कृति से अवगत कराते हैं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ गायत्री पाठक ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के आचार्या रेखा कुमारी,शम्मी राज,राजेश महतो,नितेश कुमार सिन्हा, रोहित राज,उषा कुमारी,अंजली कुमारी,गायत्री कुमारी,अनूप झा,बच्चूलाल तिवारी,गौतम कुमार,शशि कान्त आदि की प्रमुख भूमिका रही।








