आशीष सिंह
उत्तरकाशी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उत्तराखंड से शुरू की गई देश की पहली हेली एंबुलेंस सेवा “संजीवनी योजना” अब बंद हो चुकी है। पहाड़ी इलाकों के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही यह सुविधा सिर्फ छह महीने ही चल पाई। मई 2025 में हुई एक दुर्घटना के बाद से यह सेवा पूरी तरह ठप है, जिससे दूरस्थ गांवों के गंभीर रोगियों और हादसे के शिकार मरीजों को बड़ा झटका लगा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अक्टूबर 2024 को एम्स ऋषिकेश से इस सेवा का शुभारंभ किया था। यह देश की पहली ऐसी हेली एंबुलेंस थी जो “108 एंबुलेंस सेवा” की तर्ज पर मुफ्त में मरीजों को हेलीकॉप्टर से अस्पताल पहुंचाने की सुविधा देती थी।
इस योजना का मकसद था कि पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता तुरंत मिल सके। गंभीर रूप से घायल, दिल के मरीज, प्रसव पीड़ित महिलाओं और अन्य गंभीर रोगियों को इस सेवा के जरिये सीधे एम्स ऋषिकेश तक पहुंचाया जा रहा था। कई मामलों में इस सेवा ने जच्चा-बच्चा दोनों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई थी।
केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई यह परियोजना आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने की भी योजना थी ताकि सभी पात्र परिवारों को इसका लाभ मिल सके। लेकिन लॉन्चिंग के छह महीने के भीतर ही सेवा बंद होने से सवाल उठ रहे हैं कि इतनी महत्वाकांक्षी और जनकल्याणकारी योजना आखिर ठप क्यों हो गई।
सूत्रों के अनुसार, मई 2025 में हेली एंबुलेंस की एक तकनीकी खराबी के चलते आपात उड़ान रद्द की गई थी। उसके बाद से यह सेवा दोबारा शुरू नहीं हो सकी। रखरखाव, संचालन खर्च और तकनीकी कारणों को इसकी प्रमुख वजह बताया जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी उत्तरकाशी, डॉ. बी.एस. रावत ने बताया कि फिलहाल राज्य सरकार आपात स्थितियों में आपदा प्रबंधन विभाग (यूकेडा) के हेलीकॉप्टरों की मदद से मरीजों को रेस्क्यू करा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार सेवा को फिर से शुरू करने के विकल्प तलाश रही है।
फिलहाल, संजीवनी योजना के ठप होने से पर्वतीय जिलों के लोगों में निराशा है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि इस सेवा को जल्द बहाल किया जाए ताकि पहाड़ों के मरीजों को समय पर जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधा फिर से मिल सके।








