कांकेर। मोदी के शासन काल में देश और प्रदेश के किसानों की स्थिति पहले की तुलना में और खराब हुई है।आज जारी एक प्रेस बयान में नागरिक अधिकार रक्षा मंच के संयोजक सुखरंजन नंदी और उप संयोजक नजीब कुरैशी ने उक्त आरोप लगाए है।
उन्होंने कहा कि देश में औसतन प्रति किसान परिवार की मासिक आय मात्र 10 हजार 218 रुपए है,एक परिवार में औसतन 5 सदस्य को माना गया है।लेकिन छत्तीसगढ़ के किसान परिवार की मासिक आय राष्ट्रीय दर के अपेक्षा कम है।
नारायण दत्त कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार यहां पर किसान परिवार का मासिक आय औसतन 5 हजार 177 रुपए है। जब कि देश के केरल में किसान परिवार की मासिक आय 17 हजार 915 रुपए, पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में 11 हजार 492 रुपए,राजस्थान में 12 हजार 220 रुपए था।यानि राष्ट्रीय किसान परिवार के आय से करीब आधा आय छत्तीसगढ़ के किसान परिवार का है। जबकि वर्ष 2018-19 में प्रदेश के किसान परिवार की मासिक आय 9 हजार 677 रुपए थी।
नेताओं ने कहा कि वास्तव में प्रदेश में किसान परिवार की मासिक आय इससे भी कम है क्योंकि प्रदेश के अधिकांश आदिवासियों के पास वनाधिकार पट्टा नहीं है और वे अपने फसलों को सरकारी सहकारी समिति में सरकारी निर्धारित समर्थन मूल्य पर बेच नहीं सकते उन्हें व्यापारियों को कम दाम पर अपने उपज को बेचना पड़ता है। साथ ही उन्हें कृषि कार्य के लिए सरकारी कोई कर्ज या अन्य सुविधाएं नहीं मिल पाता है। वे कृषि कार्य के लिए महाजनों,व्यापारियों से या माइक्रो फाइनेंस कम्पनियों से ऊंचे ब्याज दर पर कर्ज लेने पर विवश है। उन्हें अपनी कर्ज और ब्याज चुकाने के लिए औने पौने दाम पर अपनी फसल को बेचना पड़ता है।
नेताओं ने कहा कि वर्ष 2012-13 से 2018- 19 के दौरान कृषि क्षेत्र में 10 प्रतिशत आय की कमी हुई है। लगभग डेढ़ करोड़ किसान उदारीकरण की नीतियों से प्रभावित हुए है और औसतन प्रति दिन दो हजार किसान अपनी कृषि कार्य छोड़ने के लिए विवश हो रहे है।
उन्होंने केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों का खुलासा करते हुए कहा कि वर्ष 2024 में केंद्र की सरकार कृषि पर आबंटित राशि महज 17.91बिलियन डॉलर किया था जबकि देश के सबसे धनी 217 व्यक्तियों की संपत्ति एक हजार 41 बिलियन डॉलर है।जिसका मायने है कृषि पर सरकारी आवंटन राशि के अपेक्षा देश के सबसे धनी 217 व्यक्तियों की संपत्ति 58 गुना अधिक है।
किसानों की फसल की उचित समर्थन मूल्य नहीं मिलने के कारण किसान कर्ज के बोझ तले दबे हुए है। सन 2022 के एक रिपोर्ट के अनुसार कर्ज के कारण 11 हजार 290 किसानों ने आत्महत्याएं करने पर मजबूर हुए है।यानी दैनिक 30 किसान देश में आत्महत्या कर रहे है।
मंच के नेताओं ने कहा सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ मजदूर और किसानों को एकजुट कर व्यापक अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है।








