भोपाल। रविवार की रात आसमान में एक बेहद खास और रोमांचक खगोलीय घटना होने जा रही है। इस रात चंद्रमा लाल तामिया रूप में दिखाई देगा, जिसे आमतौर पर **ब्लड मून** कहा जाता है। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह अवसर बेहद खास है, क्योंकि यह वर्ष 2025 का आखिरी चंद्रग्रहण होगा और 2022 के बाद का सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण भी है।
नेशनल अवार्ड से सम्मानित विज्ञान प्रसारक **सारिका घारू** ने बताया कि जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी बीच में होती है, तब चंद्रमा तक सूर्य की सीधी रोशनी नहीं पहुंच पाती। इस स्थिति में पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की लाल तरंगों को चंद्रमा तक पहुंचा देता है, जिसके कारण चांद लाल दिखाई देता है। यही वजह है कि इसे ब्लड मून कहा जाता है।
भारतीय समयानुसार इस खगोलीय घटना की शुरुआत रविवार रात **09 बजकर 57 मिनट 09 सेकंड** पर आंशिक ग्रहण से होगी। इसके बाद **11 बजकर 48 सेकंड** पर पूर्ण चंद्रग्रहण आरंभ होगा। पूर्ण ग्रहण का यह अद्भुत नजारा रात **12 बजकर 22 मिनट 51 सेकंड** तक दिखाई देगा। इसके बाद ग्रहण की आंशिक स्थिति जारी रहेगी और अंततः रात **01 बजकर 26 मिनट 31 सेकंड** पर समाप्त होगी।
इस बार पूर्ण ग्रहण की अवधि लगभग **1 घंटा 22 मिनट** की रहेगी, जो कि 2022 में हुए 1 घंटा 25 मिनट के ग्रहण के बाद सबसे लंबी अवधि का है।
सबसे खास बात यह है कि इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होगी। न तो टेलीस्कोप और न ही किसी तरह के ग्रहण चश्मे की जरूरत है। लोग इसे अपनी खुली आंखों से ही आसानी से देख सकेंगे।
यह खगोलीय घटना न केवल भारत बल्कि एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और यूरोप सहित विश्व की लगभग **85 प्रतिशत आबादी** देख पाएगी। इस अवसर पर खगोल प्रेमियों के साथ आम लोग भी रात के आसमान में अद्भुत और रहस्यमयी लाल चांद का आनंद ले सकेंगे।








