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चितरपुर कॉलेज में “सतर्कता – हमारी साझा जिम्मेदारी” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन

चितरपुर: सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड रजरप्पा क्षेत्र द्वारा सतर्कता जागरूकता अभियान–2025 के अंतर्गत बुधवार को चितरपुर कॉलेज, चितरपुर में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय था — “सतर्कता – हमारी साझा जिम्मेदारी: सत्यनिष्ठा, नैतिकता एवं सुशासन के परिप्रेक्ष्य में”। इस आयोजन में सैकड़ों विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं स्वागत गीत के साथ हुआ। मंच पर उपस्थित अतिथियों का स्वागत चितरपुर कॉलेज की प्राचार्या डॉ. संध्या ने पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह देकर किया।

मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) इन्द्रजीत सिंह सोढ़ी, प्रोफेसर (लोक प्रशासन), जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली ने अपने व्याख्यान में कहा कि सतर्कता केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक जीवन दृष्टिकोण है।

उन्होंने कहा कि “सत्यनिष्ठा और नैतिकता किसी भी संस्था या शासन प्रणाली की आत्मा होती है। यदि व्यक्ति स्तर पर पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित हो जाए, तो समाज और शासन दोनों में सुशासन स्वतः स्थापित होता है।” डॉ. सोढ़ी ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में ईमानदारी को न केवल अपनाएँ, बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।

मुख्य अतिथि श्री प्रदीप कुमार रामदास, मुख्य प्रबंधक (खनन), सीसीएल राजरप्पा क्षेत्र ने कहा कि सतर्कता एक सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि सीसीएल जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाएँ निरंतर भ्रष्टाचार-मुक्त कार्यसंस्कृति के निर्माण हेतु प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कर्मचारियों और युवाओं से अपील की कि वे पारदर्शी कार्यप्रणाली और निष्ठा को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं।

विशिष्ट अतिथि श्री आशीष झा, सहायक प्रबंधक (सामुदायिक विकास), सीसीएल राजरप्पा क्षेत्र ने कहा कि सामुदायिक स्तर पर जागरूकता और नैतिक शिक्षा के प्रसार से ही सुशासन की जड़ें मजबूत होती हैं। उन्होंने बताया कि सीसीएल द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों का उद्देश्य भी यही है कि लोग सतर्कता और जिम्मेदारी की भावना से प्रेरित होकर समाज में योगदान दें।

कॉलेज की प्राचार्या डॉ. संध्या ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा संस्थानों की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और उत्तरदायित्व की भावना का विकास करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने सीसीएल को धन्यवाद देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हैं।

संगोष्ठी में वक्ताओं के रूप में डॉ. संजय सिंह, सहायक प्राध्यापक, रामगढ़ विमेंस इंटर कॉलेज, रामगढ़, और डॉ. आशीष आनंद, सहायक प्राध्यापक (प्रबंधन विभाग), विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग ने भी अपने विचार रखे। डॉ. संजय सिंह ने कहा कि नैतिकता की जड़ें परिवार और शिक्षा संस्थान से शुरू होती हैं, जबकि डॉ. आशीष आनंद ने प्रबंधन और नेतृत्व में पारदर्शिता की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने सतर्कता, नैतिकता और सुशासन से संबंधित प्रश्न पूछे और वक्ताओं से उपयोगी मार्गदर्शन प्राप्त किया। संगोष्ठी के दौरान विचारोत्तेजक शैक्षणिक विमर्श हुआ, जिसमें सत्यनिष्ठा और जवाबदेही को एक सशक्त समाज की नींव बताया गया। कार्यक्रम का संचालन चितरपुर कॉलेज के शिक्षकों द्वारा किया गया तथा अंत में आभार प्रदर्शन किया गया। संगोष्ठी की सफलता ने यह सिद्ध किया कि जब शिक्षा संस्थान और औद्योगिक संगठन मिलकर कार्य करते हैं, तो समाज में ईमानदारी, पारदर्शिता और सुशासन की भावना को व्यापक रूप से फैलाया जा सकता है।

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