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नारी शक्ति वंदन कानून पर छात्रों की खुली बहस, क्या बदलेगा महिलाओं का भविष्य?

देहरादून में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक विचार-विमर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों और शिक्षाविदों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर संवाद स्थापित करना और जागरूकता बढ़ाना था।

यह चर्चा कार्यक्रम डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून के सेमिनार हॉल (बॉटनी गैलरी) में आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें कॉलेज के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ संकाय सदस्य और इग्नू क्षेत्रीय केंद्र देहरादून के शिक्षाविद भी शामिल रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अनिल के. डिमरी ने की, जिन्होंने चर्चा के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता के रूप में इतिहास संकाय की प्रो. अंजू बाला पांडे ने अधिनियम की पृष्ठभूमि और इसके सामाजिक प्रभावों को विस्तार से समझाया।

चर्चा का मुख्य विषय था—“नीति-निर्माण और विधायिकाओं में महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व के पीछे सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाएँ।” इस विषय पर 10 प्रतिभागियों (7 छात्राएं और 3 छात्र) ने अपने विचार रखे और महिला सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गंभीर मंथन किया।

कार्यक्रम के दौरान सहायक क्षेत्रीय निदेशक डॉ. जगदंबा प्रसाद और अध्ययन केंद्र की समन्वयक डॉ. ओनिमा शर्मा ने चर्चा की प्रक्रिया को संचालित किया, जबकि डॉ. विकास चौबे ने पूरे कार्यक्रम का समन्वय किया।

इस अवसर पर डॉ. नैना श्रीवास्तव, डॉ. उषा पाठक, डॉ. अमित कुमार, डॉ. ए.सी. बाजपेयी और डॉ. ज्योति सेंगर सहित अन्य शिक्षाविद भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम ने न केवल छात्रों को अपने विचार रखने का मंच दिया, बल्कि महिला प्रतिनिधित्व और समानता के मुद्दे पर सार्थक संवाद को भी प्रोत्साहित किया।

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