देहरादून। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नया नवीकरणीय ऊर्जा टैरिफ जारी करते हुए राज्य में हरित ऊर्जा को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आयोग के इस फैसले को ऊर्जा क्षेत्र के लिए दूरदर्शी और उपभोक्ता हितैषी माना जा रहा है। खास बात यह है कि सौर ऊर्जा परियोजनाओं की दरों को स्थिर रखते हुए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) की दरों में करीब 35 प्रतिशत की बड़ी कटौती की गई है।
नए आदेश के तहत बीईएसएस का क्षमता शुल्क 3.96 लाख रुपये प्रति मेगावाट प्रतिमाह से घटाकर 2.59 लाख रुपये प्रति मेगावाट प्रतिमाह कर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में सौर ऊर्जा के भंडारण को अधिक किफायती बनाएगा और ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। इससे पीक ऑवर्स के दौरान महंगी बिजली खरीद की आवश्यकता कम होगी, जिसका लाभ अंततः उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली के रूप में मिलेगा।
आयोग ने राज्य की भौगोलिक और तकनीकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कैनाल बैंक और कैनाल टॉप सौर परियोजनाओं के लिए भी व्यावहारिक टैरिफ तय किए हैं। नहरों के किनारे विकसित होने वाली कैनाल बैंक परियोजनाओं का टैरिफ 4.10 रुपये प्रति यूनिट पर यथावत रखा गया है, जबकि नहरों के ऊपर स्थापित होने वाली कैनाल टॉप परियोजनाओं की अधिक निर्माण लागत को देखते हुए उनका टैरिफ 4.20 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित किया गया है।
वहीं, अपेक्षाकृत महंगी सोलर थर्मल तकनीक को लेकर आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। 11.90 रुपये प्रति यूनिट टैरिफ वाली इस तकनीक के लिए अलग टैरिफ व्यवस्था को वित्तीय वर्ष 2027-28 से समाप्त करने के संकेत दिए गए हैं।
यूईआरसी का यह नया टैरिफ आदेश राज्य में स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा विकास को गति देने के साथ-साथ बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रगतिशील पहल माना जा रहा है।








