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परेड ग्राउंड में सजी संस्कृति की पाठशाला, छात्रों ने किया लोक विरासत का अनुभव

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और विरासत को नजदीक से समझने के उद्देश्य से **एडिफाई वर्ल्ड स्कूल, देहरादून** के 150 विद्यार्थियों ने परेड ग्राउंड में आयोजित **उत्तरायणी कौथिग (मेला)** का शैक्षणिक भ्रमण किया। विद्यालय के 6 शिक्षकों के मार्गदर्शन में छात्रों ने इस सांस्कृतिक यात्रा के माध्यम से पहाड़ की लोक जीवनशैली से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ने का अनुभव प्राप्त किया।

उत्तरायणी कौथिग में विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक एवं हस्तशिल्प स्टालों का भ्रमण किया। छात्रों ने **रिंगाल से बने उत्पाद**, तांबे के पारंपरिक बर्तन, ऊनी वस्त्र, हस्तनिर्मित कलाकृतियाँ और स्थानीय शिल्प को बड़े उत्साह के साथ देखा और उनके निर्माण की प्रक्रिया को समझा। इस दौरान बच्चों ने जाना कि किस प्रकार पारंपरिक कारीगरी पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक धरोहर है।

मेले में आयोजित **छोलिया नृत्य** और पारंपरिक लोकगीतों ने विद्यार्थियों को विशेष रूप से आकर्षित किया। ढोल-दमाऊं की थाप पर प्रस्तुत नृत्य ने उन्हें कुमाऊँनी संस्कृति की वीरता और उल्लास से परिचित कराया। लोकगीतों के माध्यम से छात्रों ने पहाड़ी जीवन की सादगी, प्रकृति से जुड़ाव और सामूहिकता को समझा।

इसके साथ ही विद्यार्थियों ने उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों जैसे **घुघुती, मंडुए की रोटी** और अन्य स्थानीय ऑर्गेनिक उत्पादों की जानकारी भी प्राप्त की। छात्रों को बताया गया कि इस तरह के मेले स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ-साथ कारीगरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

शैक्षणिक भ्रमण के दौरान छात्रों ने यह भी समझा कि **‘वोकल फॉर लोकल’** जैसे अभियानों से किस प्रकार स्थानीय संस्कृति और आजीविका को बल मिलता है। यह अनुभव उनके लिए केवल एक भ्रमण नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर बना।

विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि इस प्रकार की गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति जागरूक करना और उन्हें जिम्मेदार, संस्कारवान नागरिक के रूप में विकसित करना है। एडिफाई वर्ल्ड स्कूल का यह प्रयास निश्चित रूप से छात्रों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक सराहनीय पहल है।

 

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