रामगढ़ । महिला साहित्य मंच ने संत शिरोमणि तुलसीदास एवं कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य में आभासी मंच पर विचार गोष्ठी का आयोजन डॉ शारदा प्रसाद की अध्यक्षता में किया।सर्वप्रथम सरस्वती वंदना का सस्वर पाठ सपना दास के द्वारा किया गया।
इसके बाद डॉक्टर शारदा प्रसाद ने उपस्थित सदस्यों का स्वागत तथा विषय प्रवर्तन कराया।
उन्होंने कहा कि संत शिरोमणि तुलसीदास समाज में समन्वय उपस्थित करने वाले सबसे बड़े लोकनायक हैं। तुलसीदास जी ने दिशा भ्रमित समाज के समक्ष एक आदर्श उपस्थित किया और भक्ति और समाज सुधार का मार्ग प्रशस्त किया।
“परहित सरिस धर्म नहिं भाई” के माध्यम से मानव धर्म को सबसे बड़ा धर्म बताया।
कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद ने समाज में आदर्श और यथार्थ का सुंदर समाहार प्रस्तुत किया। ‘गोदान’, ‘सेवा सदन’, ‘रंगभूमि’, ‘कर्मभूमि’ ‘गबन’ तथा लगभग 300 कहानियों के द्वारा समाज का जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया। दोनों एक पुरुष सिर्फ अपने कल ही नहीं वरन आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं। उन्होंने कालजयी साहित्य की रचना करके समाज का बड़ा उपकार किया है। नज़्मकारा मीनू झा ने सुंदर मंच संचालन करते हुए अपनी कविता ‘चांद और चांदनी’ के द्वारा सबका मन मोह लिया। उन्होंने तुलसी और प्रेमचंद को कालजयी साहित्यकार कहा। सीमा साहा ने प्रेमचंद की कहानियां का संक्षेप में प्रकाश डाला और कविता ‘ख्वाहिश नहीं मुझे मशहूर होने की, मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीका’ सुनाकर वाहवाही बटोरी। चांदनी ने तुलसीदास जी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि तुलसीदास जी ने ‘रामचरितमानस’ व ‘हनुमान चालीसा’ का उपहार समाज को देकर बड़ा ही उपकार किया। शुभम रश्मि, श्रीषा, स्वीटी, रिया सिंह, तृप्ति झा, प्रीति कुमारी ने भी दोनों युग-पुरुषों को श्रद्धांजलि समर्पित करते हुए उनके विषय में अपनी बातें रखीं।
धन्यवाद ज्ञापन सीमा साहा ने किया।








