---Advertisement---

हर साल बढ़ रहे सड़क हादसे, विशेषज्ञों की चेतावनी—गति नियंत्रण ही एकमात्र समाधान

देश की आर्थिक प्रगति में सड़क परिवहन व्यवस्था की अहम भूमिका होती है। बेहतर सड़कों का जाल किसी भी क्षेत्र की तरक्की और विकास का प्रतीक माना जाता है। केंद्र और राज्य सरकारें लगातार नई सड़कें बना रही हैं, जिससे यातायात और व्यापार को गति मिल रही है। लेकिन इसके साथ-साथ सड़कों पर वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है, जिससे सड़क सुरक्षा एक गंभीर चिंता बनती जा रही है।

तेज रफ्तार आज सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण बन चुकी है। सड़क पर दौड़ते वाहन कई बार यमराज का रूप ले लेते हैं और पैदल चलने वाले, साइकिल सवार तथा दोपहिया चालक सबसे अधिक इसके शिकार होते हैं।  भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर** के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर  भार्गव मैत्रा  द्वारा 2020 से 2023 तक किए गए अध्ययन में सामने आया कि सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों का प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है और इनमें बड़ी संख्या दोपहिया सवारों व पैदल यात्रियों की है।

अध्ययन के अनुसार ओवरस्पीडिंग ही अधिकांश हादसों की मुख्य वजह है। देश में गति नियंत्रण के प्रभावी उपायों की कमी के कारण दुर्घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सड़कों पर गति नियंत्रक उपायों को सख्ती से लागू किया जाए तो हादसों में बड़ी कमी लाई जा सकती है।

वहीं  सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक देश में एक वर्ष में लगभग 4.73 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1.77 लाख लोगों की जान चली गई। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इन मृतकों में 18 से 34 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। यह आंकड़े किसी बड़े युद्ध में होने वाली मौतों से भी अधिक हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं।

सड़क दुर्घटनाओं के अन्य कारणों में लापरवाही, खतरनाक ओवरटेकिंग, खराब सड़कें, गड्ढे और आवारा पशु भी शामिल हैं। विशेष रूप से राज्य मार्गों और ग्रामीण सड़कों की खराब स्थिति दुर्घटनाओं को और बढ़ा रही है।

ऐसे में आवश्यक है कि सरकार सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने, ब्लैक स्पॉट सुधारने और गति नियंत्रण नीति को सख्ती से लागू करने पर प्राथमिकता से काम करे। सुरक्षित सड़कें केवल यातायात की सुविधा नहीं, बल्कि देश की वास्तविक प्रगति और नागरिकों के जीवन की सुरक्षा का प्रतीक हैं।

 

Related Post