रामगढ़। जिले में गुरुवार को राष्ट्रीय फ्लोरोसिस नियंत्रण कार्यक्रम (NPPCF) के तहत एक दिवसीय जांच शिविर का आयोजन उत्क्रमित मध्य विद्यालय फूलसराय, मांडू में किया गया। शिविर का नेतृत्व सिविल सर्जन डॉ. महालक्ष्मी प्रसाद और जिला नोडल पदाधिकारी डॉ. तुलिका रानी ने संयुक्त रूप से किया।
शिविर में विद्यालय परिसर के पेयजल स्रोतों के पानी के नमूनों की जांच भी की गई। इस दौरान कुल 128 बच्चों की चिकित्सकीय जांच की गई। डॉ. पल्लवी कौशल (जिला कंसल्टेंट) और गीतांजलि कुमारी (एएएम फूलसराय) ने बच्चों की जांच की। जांच के बाद 52 बच्चों में फ्लोरोसिस के लक्षण पाए गए, जिनमें से मूत्र जांच के बाद 36 बच्चों में इस बीमारी की पुष्टि हुई।
शिविर के दौरान बच्चों और स्कूल स्टाफ को फ्लोरोसिस बीमारी से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ. पल्लवी कौशल ने बताया कि यह बीमारी मुख्य रूप से पीने के पानी में फ्लोराइड की अधिकता के कारण होती है। इसके अलावा सेंधा नमक, काला नमक और ज्यादा मात्रा में लाल चाय का सेवन करने से भी इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने सलाह दी कि लोग अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, खट्टे फल जैसे संतरा, नींबू और आंवला, साथ ही दूध से बने उत्पादों को शामिल करें। इससे शरीर में फ्लोराइड का जमाव कम होता है और बीमारी से बचाव संभव हो पाता है।
साथ ही लोगों को यह भी बताया गया कि सदर अस्पताल, रामगढ़ में कोई भी व्यक्ति निःशुल्क अपने पीने के पानी और मूत्र की फ्लोरोसिस जांच करा सकता है।
शिविर की सफलता में क्षेत्र की सीएचओ, सहिया और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का विशेष योगदान रहा। इस पहल से स्थानीय स्तर पर फ्लोरोसिस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय रहते इसका निदान करने में मदद मिलेगी।








