---Advertisement---

बारिश और पकवान: कलाकारों ने बताया अपने शहरों का पसंदीदा ज़ायका

मुंबई। मानसून का मौसम अपने साथ कुछ जादुई एहसास लेकर आता है-रिमझिम गिरती बारिश की बूंदें, मिट्टी की सोंधी-सोंधी खुशबू, और गरमा-गरम स्ट्रीट फूड खाने की बेताबी।

कई कलाकारों के लिए बारिश सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि यादों की बारिश है, जो बचपन के किस्से-कहानियों को ताज़ा करती है और दिल में छिपे स्वाद की तड़प को फिर से जगा देती है।

एण्डटीवी के कलाकार हमें ले चल रहे हैं अपने-अपने शहरों की स्वादभरी गलियों में, जहाँ मानसून की रिमझिम के साथ उनकी पसंदीदा पारंपरिक डिशेज़ आज भी उनकी ज़िंदगी में खुशियों की फुहार बनकर बरसती हैं।

पारस अरोड़ा उर्फ़ ‘घरवाली पेड़वाली‘ के जीतू कहते हैं, ‘‘मानसून का मौसम आते ही क्रेविंग्स का स्विच अपने आप ऑन हो जाता है! यूपी से होने के नाते सबसे पहले मेरे ज़ेहन में चाट आती है-तीखी, चटपटी और दिल को संतुष्ट करने वाली।

हाँ, वड़ा पाव भले ही मुंबई का फेवरेट स्नैक हो, लेकिन बरेली में इसका अपना देसी ट्विस्ट है, जो बारिश में उतना ही लाजवाब लगता है। मुझे तो ख़ासकर आलू टिक्की बहुत पसंद है, जिस पर ढेर सारी चटनी डली हो, और जब वो बारिश में ठेले के नीचे खड़ी होकर खाई जाए, तो उसका स्वाद दोगुना हो जाता है।

योगेश त्रिपाठी उर्फ़ दरोगा हप्पू सिंह (हप्पू की उलटन पलटन) कहते हैं, ‘‘मानसून और यूपी का खाना- मानो ऊपर वाले ने ख़ुद ये जोड़ी बनाकर भेजी हो!

जैसे ही काले बादल छाते हैं, दिल और रसोई, दोनों में कुछ-कुछ हलचल होने लगती है। मेरे कानपुर वाले घर में पहली बारिश के साथ ही गर्म-गर्म समोसे और कचौड़ियों की ख़ुशबू फैल जाती थी, साथ में अदरक वाली कड़क चाय।

शुभांगी अत्रे उर्फ़ ‘भाबीजी घर पर हैं‘ की अंगूरी भाबी कहती हैं, “इंदौर की बारिश में एक अलग ही तरह की ठहराव भरी रूमानी खुशबू होती है। मानसून आते ही शहर मानो फिज़ाओं में घुल जाता है-धुंधली सुबहें, मिट्टी की सोंधी महक और हर गली-चौराहे से उठती चटपटे स्ट्रीट फूड की खुशबू… सब कुछ एक साथ जादू सा लगने लगता है।

Related Post