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रामगढ़ डीसी फैज अक अहमद मुमताज की तत्परता से छात्र की बची जान: मानवता और कर्तव्य का अद्भुत उदाहरण

रामगढ़, झारखंड | 

रामगढ़ जिले के उपायुक्त (डीसी) फैज अक अहमद मुमताज की सतर्कता, संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता ने एक छात्र की जान बचा ली। गुरुवार को उपायुक्त जब रामगढ़ के गांधी स्मारक प्लस टू मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय का निरीक्षण कर रहे थे, तभी एक अप्रत्याशित और गंभीर घटना घटित हुई। स्कूल के प्रांगण में निरीक्षण के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि कक्षा 12वीं के छात्र अभय कुमार को किसी जहरीले जीव—संभावित रूप से सांप या बिच्छू—ने काट लिया है।

सूचना मिलते ही उपायुक्त खुद छात्र के पास पहुंचे। उन्होंने देखा कि अभय कुमार बेहोशी की हालत में था और उसके मुंह से झाग निकलने लगा था। हालात की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त ने बिना किसी विलंब के तत्काल निर्णय लिया। उन्होंने मौके पर ही प्राथमिक चिकित्सा शुरू की—अपने लैपटॉप चार्जर की मदद से छात्र के हाथ को कसकर बांधा ताकि जहर शरीर में और अधिक न फैल सके। यह एक प्रभावी प्राथमिक उपचार है जिसे सही समय पर किया जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है।

इसके बाद उपायुक्त ने और देर किए बिना अपनी सरकारी गाड़ी से छात्र को सदर अस्पताल रामगढ़ पहुंचाया। अस्पताल में उन्होंने डॉक्टरों को तत्काल उपचार शुरू करने का निर्देश दिया और स्वयं इलाज की प्रक्रिया की निगरानी करते रहे। चिकित्सकों की टीम ने भी तत्परता दिखाते हुए छात्र को तुरंत बाइट वैक्सीन (एंटीवेनम) दिया और निगरानी में रखा।

अस्पताल सूत्रों के मुताबिक छात्र की स्थिति अब स्थिर है और उसमें तेजी से सुधार हो रहा है। छात्र को अब सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है और वह चिकित्सकों की निगरानी में है। इस पूरे घटनाक्रम में जिस तरह से डीसी फैज अक अहमद मुमताज ने नेतृत्व किया, उसकी चारों ओर सराहना हो रही है।

छात्र अभय के परिजनों ने जताया आभार

छात्र अभय कुमार के परिजनों ने उपायुक्त का दिल से धन्यवाद दिया और कहा कि “अगर डीसी साहब समय पर न आते और खुद इलाज में शामिल न होते, तो न जाने क्या हो जाता।” उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं, एक जिम्मेदार नागरिक और सच्चे सेवक की पहचान है।

स्थानीय लोगों और शिक्षकों में भी प्रशंसा की लहर

विद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भी उपायुक्त की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह उदाहरण साबित करता है कि अगर प्रशासनिक अधिकारी मानवता के साथ कर्तव्य निभाएं तो समाज में बदलाव संभव है। विद्यालय के प्रधानाचार्य ने कहा, “उपायुक्त महोदय ने जिस तरह से तत्परता दिखाई, वह प्रशंसनीय है। उनकी उपस्थिति ने संकट की घड़ी में बड़ी राहत दी।”

एक आदर्श प्रशासक की मिसाल

डीसी फैज अक अहमद मुमताज की यह कार्रवाई दर्शाती है कि एक प्रशासक सिर्फ कागजों और बैठकों तक सीमित नहीं होता, बल्कि जब जरूरत पड़े तो वह जमीन पर उतरकर लोगों की सेवा में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। उनकी इस संवेदनशीलता ने यह भी दिखा दिया कि प्रशासन यदि चाहे तो मानवता को प्राथमिकता देते हुए आम जनता के जीवन में बड़ा फर्क ला सकता है।

इस घटना ने जहां एक छात्र की जान बचाई, वहीं प्रशासनिक कार्यशैली में एक नई ऊर्जा और प्रेरणा भी दी है। जिले में यह उदाहरण लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

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