देहरादून। उत्तराखंड सरकार के स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में लगाए जा रहे स्वास्थ्य शिविर गर्भवती महिलाओं के लिए बड़ी राहत साबित हो रहे हैं। इन शिविरों में न केवल सामान्य स्वास्थ्य जांच की जा रही है बल्कि गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व देखभाल (एएनसी) संबंधी परामर्श भी दिया जा रहा है। अब तक 80,515 गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच की जा चुकी है, जिसमें मां और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य का आकलन किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, देहरादून में सबसे अधिक 15,728, ऊधमसिंह नगर में 21,509 और हरिद्वार में 14,472 गर्भवती महिलाओं की जांच हुई। वहीं, नैनीताल में 7,853, टिहरी में 4,650 और अल्मोड़ा में 2,195 महिलाओं ने जांच करवाई। जांच के दौरान महिलाओं का रक्तचाप, वजन, शुगर लेवल, एचआईवी और यूरीन समेत कई जरूरी परीक्षण किए गए।
अभियान के तहत उच्च जोखिम गर्भधारण वाली महिलाओं की विशेष पहचान की गई और उन्हें सोनोग्राफी सहित अतिरिक्त चिकित्सीय परामर्श दिया गया। इनमें वे महिलाएं शामिल थीं जिनका पहला प्रसव ऑपरेशन से हुआ हो, जिन्हें गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप या मधुमेह जैसी बीमारियां हों, कम उम्र में गर्भधारण हुआ हो या पहले गर्भपात व मृत शिशु का जन्म हुआ हो।
डॉक्टरों ने गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार, नियमित दवा सेवन और पोषक आहार जैसे हरी सब्जियां, दूध, सोयाबीन, फल, चना और गुड़ के सेवन की सलाह दी। एनीमिक महिलाओं को आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां भी वितरित की गईं।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए राज्य सरकार गंभीरता से काम कर रही है। इसके लिए एएनएम, आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविकाओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एएनसी जांच बेहद जरूरी है क्योंकि इससे गर्भावस्था के दौरान मां और बच्चे की सेहत का समय पर पता चल जाता है और जटिलताओं से बचाव किया जा सकता है।








