रजरप्पा कोयलांचल स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में शनिवार को वाटिका खंड के द्वितीय वर्ग के भैया-बहनों के अभिभावकों के लिए विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी का उद्देश्य अभिभावकों और शिक्षकों के बीच संवाद को सुदृढ़ बनाना तथा छात्रों के शैक्षणिक और मानसिक विकास के लिए संयुक्त प्रयासों को प्रोत्साहित करना था।
गोष्टि का शुभारंभ विद्यालय के उपाध्यक्ष चंद्रशेखर चौधरी, प्राचार्य उमेश प्रसाद और कार्यक्रम की अध्यक्ष सुलेखा देवी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर विद्यालय के विभिन्न अधिकारी, शिक्षक और अभिभावक उपस्थित रहे।
अभिभावकों की भूमिका पर जोर
उपाध्यक्ष चंद्रशेखर चौधरी ने अपने संबोधन में अभिभावकों की शिक्षा में भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “विद्यालय और घर दोनों का सहयोग बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। अभिभावकों का समर्थन और मार्गदर्शन बच्चों के उज्जवल भविष्य की नींव रखता है।”
प्राचार्य उमेश प्रसाद ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच भी बच्चों के साथ समय बिताएं। उन्होंने कहा, “जब बच्चे अपने अभिभावकों के साथ समय बिताते हैं, तो वे अधिक खुलकर अपनी बातें साझा करते हैं। यह बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए बहुत जरूरी है।”
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रासंगिकता
प्राचार्य उमेश प्रसाद ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का भी उल्लेख करते हुए बताया कि इस नीति के तहत बच्चों को उनकी मातृभाषा में अधिक से अधिक अध्ययन करने की प्रेरणा दी जाती है। इससे घर में एक सकारात्मक और शैक्षिक वातावरण बनता है, जो बच्चे की समझ और सीखने की क्षमता को बढ़ाता है।
उन्होंने कहा, “इस तरह की गोष्ठियाँ अभिभावकों और शिक्षकों को एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझने का अवसर प्रदान करती हैं, जिससे बच्चों की आवश्यकताओं और अभिभावकों की अपेक्षाओं को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।”
अभिभावकों ने जताई सराहना
गोष्टि में उपस्थित अभिभावकों ने इस पहल की भरपूर सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवाद से वे विद्यालय और शिक्षकों के प्रयासों को समझ पाते हैं, जो बच्चों की शिक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं। अभिभावकों ने विद्यालय के प्रति आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों की मांग की।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और कार्यक्रम संचालन
कार्यक्रम में बच्चों ने मनमोहक गीत और नृत्य प्रस्तुत किए, जिसने सभी का मन मोह लिया। अभिभावकों का स्वागत रानी कुमारी दीदी ने किया, जबकि कार्यक्रम के महत्व पर डॉ. गायत्री कुमारी ने प्रकाश डाला। गोष्ठी का सफल संचालन आचार्या ललिता गिरि ने किया। धन्यवाद ज्ञापन आचार्या पूनम सिंह ने प्रस्तुत किया।कार्यक्रम को सफल बनाने में आचार्य विदेश सिंह, ज्योति कुमारी, रोहित राज, दुर्गा प्रसाद, सत्येंद्र मिश्रा, देव कुमार और अनूप झा सहित अन्य शिक्षक एवं स्टाफ की अहम भूमिका रही।








