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पदुबिद्री सहकारी कृषि समिति ग्रामीण स्वावलंबन की परिकल्पना है” : डॉ. धन सिंह रावत

उत्तराखंड के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कर्नाटक राज्य के उडुपी जिले में स्थित पदुबिद्री सहकारी कृषि समिति (उत्तरी) का भ्रमण कर समिति की कार्यप्रणाली और नवाचारों का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारिता के माध्यम से विकास की दिशा में किए गए प्रयासों की सराहना की और इसे उत्तराखंड में सहकारिता नवाचार को विस्तार देने के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत बताया।

डॉ. रावत कर्नाटक राज्य के सहकारी समितियों और संस्थाओं के दो दिवसीय भ्रमण पर थे, जहाँ उन्होंने विभिन्न सहकारी मॉडल्स के बारे में सीखा। पदुबिद्री सहकारी कृषि समिति, जो 1958 में स्थापित हुई थी, ने 12,207 से अधिक सदस्यों को जोड़ते हुए उत्तर कर्नाटक के विभिन्न गाँवों में आर्थिक सशक्तिकरण के उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। समिति का कामकाजी मॉडल, पारदर्शिता, और नवाचार ग्रामीण भारत में सहकारिता के माध्यम से सतत विकास की दिशा में एक उज्जवल उदाहरण बनकर उभरा है।

पदुबिद्री सहकारी कृषि समिति का योगदान

पदुबिद्री सहकारी कृषि समिति ने विभिन्न सेवाओं और नवाचारों के माध्यम से ग्रामीण विकास में अहम भूमिका निभाई है। इसके अंतर्गत विशेष रूप से:

  • ब्याज दरें: फिक्स्ड डिपॉजिट पर 8.5% तक ब्याज, बचत खातों पर 4% ब्याज।

  • किसानों के लिए विशेष ऋण योजनाएँ: आवास, वाहन, शिक्षा, समूह ऋण, और एमकेसीसी/एमटीएनएपी जैसे ऋण।

  • ग्रामीण सेवा केंद्र: उर्वरक और बीज वितरण, कृषि उपकरण विक्रय, स्वर्ण शुद्धता परीक्षण, सभा भवन किराया।

  • आधुनिक बैंकिंग सेवाएँ: NEFT/RTGS जैसी बैंकिंग सेवाओं की उपलब्धता।

इस प्रकार, समिति ने न केवल वित्तीय सशक्तिकरण की दिशा में काम किया, बल्कि स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाओं को ढालने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। समिति के साथ जुड़ने वाले किसानों, महिलाओं और युवाओं ने इससे आर्थिक रूप से लाभ उठाया है।

डॉ. रावत का वक्तव्य

सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने पदुबिद्री सहकारी समिति के कार्यों को देखकर गहरी प्रेरणा ली और कहा, “पदुबिद्री सहकारी समिति की कार्यप्रणाली देखकर गहरी प्रेरणा मिली है। ग्राम्य भारत में सहकारिता के माध्यम से किस प्रकार सतत विकास, पारदर्शिता और लोक-विश्वास की स्थापना की जा सकती है — इसका यह जीवंत उदाहरण है। समिति द्वारा अपनाए गए तकनीकी और व्यावसायिक नवाचार निश्चित ही उत्तराखंड राज्य में भी सहकारिता की नई दिशा तय करने में सहायक होंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में यदि ऐसी योजनाएँ स्थानीय आवश्यकता अनुसार ढाली जाएँ, तो युवाओं, किसानों और महिला समूहों के लिए एक नई आर्थिक शक्ति का उदय हो सकता है।” यह वक्तव्य इस बात का संकेत है कि सहकारिता मंत्री उत्तराखंड में सहकारिता को नवाचार और आत्मनिर्भरता के साथ जोड़ने के लिए तैयार हैं।

समिति की कार्यप्रणाली और नवाचार

पदुबिद्री सहकारी कृषि समिति के पदाधिकारियों ने मंत्री महोदय को संस्था की कार्यप्रणाली और सामाजिक-आर्थिक पहलुओं से अवगत कराया। मंत्री ने विशेष रूप से समिति द्वारा अपनाए गए पारदर्शी लेखा प्रणाली, लाभांश वितरण की प्रक्रिया और सामुदायिक भागीदारी के विभिन्न पहलुओं की सराहना की। डॉ. रावत ने कहा कि इन पहलुओं के माध्यम से जनता में विश्वास और सहयोग बढ़ा है, जो एक स्थिर और समृद्ध ग्रामीण समाज की नींव रखने में मदद करता है।

उत्तराखंड में सहकारिता नवाचार का विस्तार

यह भ्रमण उत्तराखंड राज्य की सहकारिता नीति में व्यापक नवाचार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। मंत्री डॉ. रावत के अनुसार, कर्नाटका के इस सहकारी मॉडल को उत्तराखंड में लागू करने से ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारिता के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और स्वावलंबन को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य उत्तराखंड में सहकारिता को एक नये स्तर पर पहुंचाना है। विशेष रूप से पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में अगर सहकारिता को इस प्रकार से संवर्धित किया जाए, तो यह न केवल क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देगा, बल्कि लोगों को उनकी आजीविका में भी स्थिरता प्रदान करेगा।”

कर्नाटका में पदुबिद्री सहकारी समिति के मॉडल को देखकर यह स्पष्ट होता है कि सहकारिता के माध्यम से स्थानीय समुदायों को सशक्त किया जा सकता है। ऐसे में उत्तराखंड में भी सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में सार्थक कदम उठाए जा सकते हैं।

एक उज्जवल भविष्य की ओर

डॉ. रावत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार जल्द ही सहकारिता क्षेत्र में टेक्नोलॉजी-संवर्धित नवाचारों को लागू करने के लिए योजना बना रही है। इनमें किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए नई योजनाएँ और सेवाएँ प्रदान की जाएंगी। इसके अलावा, सहकारी समितियों के लिए समग्र विकास की योजनाएँ तैयार की जा रही हैं, ताकि वे स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को सुधार सकें।

इस भ्रमण से न केवल सहकारिता क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि उत्तराखंड को एक नए आर्थिक मॉडल की ओर भी अग्रसर किया जा सकेगा। पदुबिद्री सहकारी समिति का यह मॉडल, जो ग्राम्य विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्यरत है, निश्चित ही उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में एक नया दृष्टिकोण उत्पन्न करेगा।

इस प्रकार, उत्तराखंड के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का यह भ्रमण न केवल सहकारिता के क्षेत्र में नवाचारों को विस्तार देने की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास में सहकारी संस्थाओं की भूमिका को भी सुदृढ़ करने में मदद करेगा।

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