फार्मा कंपनियों, थोक व फुटकर विक्रेताओं की दुकानों पर कसेगा शिकंजा; सैंपल भेजे जाएंगे जांच को
देहरादून। प्रदेश में स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर “ऑपरेशन क्लीन” नामक विशेष अभियान की शुरुआत शनिवार से की जा रही है। यह अभियान नकली और घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के उद्देश्य से चलाया जाएगा। इस दौरान राज्यभर में फार्मा कंपनियों, दवा गोदामों, थोक और फुटकर विक्रेताओं की दुकानों का निरीक्षण किया जाएगा और संदिग्ध दवाओं के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजे जाएंगे।
इस अभियान की निगरानी के लिए खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने विशेष रूप से एक क्विक रिस्पांस टीम (QRT) का गठन किया है, जिसकी कमान सहायक औषधि नियंत्रक हेमंत सिंह नेगी को सौंपी गई है। इस टीम में आठ सदस्य शामिल किए गए हैं, जिन्हें राज्य के विभिन्न जिलों में जाकर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।
प्रदेश सरकार का सख्त रुख
मुख्यमंत्री धामी ने हाल ही में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त करते हुए निर्देश दिया था कि नकली, मिलावटी और एक्सपायर्ड दवाओं के विरुद्ध कठोर कदम उठाए जाएं। इसी के तहत यह विशेष अभियान तैयार किया गया है, जो अगले कुछ हफ्तों तक चरणबद्ध ढंग से चलेगा।
सरकार का उद्देश्य न केवल नकली दवा व्यापार को जड़ से खत्म करना है, बल्कि नागरिकों में यह विश्वास भी पैदा करना है कि राज्य में मिलने वाली दवाएं पूरी तरह से सुरक्षित और प्रमाणिक हैं।
दवा सैंपल होंगे सीलबंद, लैब में जांच
अभियान के तहत फार्मा कंपनियों और दुकानों से लिए गए दवा सैंपलों को सीलबंद कर राज्य व केंद्रीय अधिकृत लैबों में भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी दवा में निर्धारित मानकों से भिन्नता पाई जाती है, तो संबंधित विक्रेताओं और कंपनियों के विरुद्ध दवा एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गोपनीयता और त्वरित कार्रवाई प्राथमिकता में
सहायक औषधि नियंत्रक हेमंत सिंह नेगी ने बताया कि क्विक रिस्पांस टीम को गोपनीय रूप से निरीक्षण करने, ऑन-स्पॉट कार्रवाई करने और सैंपलिंग की प्रक्रिया में किसी प्रकार की ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए गए हैं। टीम के सदस्य पहले से किसी दुकान या कंपनी को जानकारी नहीं देंगे, ताकि कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष और प्रभावी हो।
उन्होंने कहा,
“जनता की सेहत से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम सभी विक्रेताओं और निर्माताओं से अपील करते हैं कि वे केवल मानक प्रमाणित दवाओं का ही व्यापार करें और नियमानुसार सभी आवश्यक दस्तावेज अपने पास रखें।”
विक्रेताओं को जागरूक करने की पहल भी
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा आगामी दिनों में दवा व्यापारियों के साथ जागरूकता बैठकों और कार्यशालाओं का भी आयोजन किया जाएगा, ताकि वे गुणवत्ता मानकों, आवश्यक लाइसेंसिंग, भंडारण प्रक्रियाओं और वैध दवाओं की पहचान से परिचित हो सकें।
जन सहयोग की भी अपील
अधिकारियों ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि उन्हें किसी दुकान से खरीदी गई दवा संदिग्ध प्रतीत हो या उसका असर अपेक्षित न हो, तो वे संबंधित विभाग को शिकायत कर सकते हैं। इस प्रकार की शिकायतों की गोपनीयता रखी जाएगी और आवश्यक कार्रवाई तत्काल की जाएगी।
स्वास्थ्य सुरक्षा सर्वोपरि
राज्य सरकार की यह पहल प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। “ऑपरेशन क्लीन” न केवल मिलावटी दवा कारोबारियों पर लगाम लगाएगा, बल्कि दवा बाजार में पारदर्शिता और विश्वास भी बहाल करेगा। प्रशासन का मानना है कि यदि यह अभियान सफल होता है, तो इसका विस्तार अन्य स्वास्थ्य संबंधित वस्तुओं—जैसे कि मेडिकल उपकरण, सेनेटाइज़र, व अन्य उत्पादों—पर भी किया जा सकता है।








