रानीखेत: जय दत्त वैला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में उद्यमशीलता, नवाचार और सतत विकास विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। इस संगोष्ठी का आयोजन वाणिज्य विभाग द्वारा उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के सहयोग तथा देवभूमि उद्यमिता योजना के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय के संरक्षक एवं प्राचार्य प्रो. पुष्पेश कुमार पांडे के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो. एस.एस. खनका ने कहा कि आज के दौर में सीखने की प्रक्रिया केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि नवाचार, शोध और व्यावहारिक अनुभव इसके महत्वपूर्ण अंग बन चुके हैं। उन्होंने युवाओं से बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का आह्वान किया।
बीज वक्ता डॉ. अतुल जोशी ने ‘इंक्रीमेंटल इनोवेशन’ और ‘सस्टेनेबल इनोवेशन’ के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पुराने विचारों को नए रूप में प्रस्तुत करना ही वास्तविक नवाचार है, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है।
संगोष्ठी में आमंत्रित वक्ताओं गोपाल दत्त उप्रेती , डॉ. तरुण सक्सैना तथा कैलाश चंद्र सती ने भी उद्यमशीलता के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। सभी वक्ताओं ने युवाओं, महिलाओं और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए स्टार्टअप आधारित पहलों को आवश्यक बताया।
संगोष्ठी में वर्ष 2016 से 2026 के बीच स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में आए बदलावों पर भी चर्चा की गई, जिसे विशेषज्ञों ने ‘परिवर्तन और प्रभाव का दशक’ बताया। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्वयं सहायता समूहों के लगभग 15 स्टॉल लगाए गए, जिनमें स्थानीय उत्पादों और नवाचार आधारित कार्यों का प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम में संगोष्ठी संयोजक प्रो. पी.एन. तिवारी सहित कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर के विभागाध्यक्ष और अनेक शिक्षाविद्, शोधार्थी तथा छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।








