रुद्रप्रयाग: आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में रुद्रप्रयाग जिले के कई ग्रामीण मतदाता मतदान से वंचित रह सकते हैं, क्योंकि उनके नाम मतदाता सूची से गायब हो गए हैं। ग्रामीणों ने इसकी जानकारी देते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी से त्वरित कार्रवाई की मांग की है, ताकि वे आगामी चुनाव में मतदान कर सकें।
ग्राम पंचायत क्वाली के 61 मतदाता प्रभावित
अगस्त्यमुनि ब्लॉक के रानीगढ़ पट्टी स्थित ग्राम पंचायत क्वाली के गडगू गांव के निवासी डीएस चौधरी ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि इस बार मतदाता सूची में गडगू, तोरियाल और क्वाली गांव से कुल 61 लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। इन नामों के कटने से इन ग्रामीणों को आगामी पंचायत चुनाव में मतदान का अधिकार नहीं मिलेगा।
डीएस चौधरी ने बताया कि गडगू गांव में दो बुजुर्ग महिलाओं के नाम जानबूझकर काटे गए हैं, जो निवर्तमान ग्राम प्रधान की पत्नी के समर्थक हैं। उनका आरोप है कि यह साजिश अन्य ग्राम प्रधान पद के प्रत्याशी द्वारा रची गई है, ताकि उनके समर्थक वोट न डाल सकें।
विरोधी प्रत्याशी के समर्थन का आरोप
चौधरी ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान पद के दूसरे प्रत्याशी ने जानबूझकर इस सूची को बदलवाया और अपने समर्थकों, रिश्तेदारों और सगे-संबंधियों के नाम सूची में जोड़े। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो ग्राम पंचायत क्षेत्र के बाहर रहते हैं, जबकि इस क्षेत्र के असल निवासियों के नाम गायब कर दिए गए हैं।
उन्होंने कहा, “यह साजिश हमारे अधिकारों का उल्लंघन है और हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। हमारी मांग है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और हमें चुनाव में भागीदारी का अधिकार दिया जाए।”
ग्रामीणों की चिंता: लोकतंत्र में विश्वास पर सवाल
ग्राम पंचायत क्वाली के प्रभावित मतदाताओं का कहना है कि इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र पर गंभीर प्रश्न उठाती हैं। ग्रामीणों ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि सभी नागरिकों को उनके अधिकारों का पूरी तरह से लाभ मिल सके। अगर यह स्थिति इसी तरह जारी रही, तो आने वाले चुनावों में जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है।
डीएस चौधरी का आक्रोश: “हमारे वोटों से खेला जा रहा है”
डीएस चौधरी ने आगे कहा, “हमारे जैसे ग्रामीणों की आवाज दबाई जा रही है। यह राजनीति के नाम पर एक घिनौनी साजिश है। कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रहे हैं। इस बार यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए, और हमें न्याय मिलना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक उनके और अन्य प्रभावित मतदाताओं के नाम सूची में वापस नहीं डाले जाते, तब तक वे चुनाव प्रक्रिया का पूरी तरह विरोध करेंगे।
अधिकारियों से जवाब की उम्मीद
ग्रामीणों ने जिला निर्वाचन अधिकारी से इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की अपील की है। उनका कहना है कि यदि जल्दी ही इस मुद्दे का समाधान नहीं हुआ, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
स्थानीय प्रशासन ने इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले की पूरी जांच करेंगे और यदि कोई गलत कदम उठाया गया है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
समाज में बढ़ती हुई असंतोष की भावना
यह घटना समाज में बढ़ते असंतोष की भावना को उजागर करती है। जहां एक ओर सरकार और प्रशासन चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती हैं।
मतदाता सूची में हेर-फेर होने की स्थिति को गंभीरता से लिया गया है, क्योंकि चुनावों में निष्पक्षता और सटीकता की आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में चुनावी प्रक्रिया को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन और निर्वाचन आयोग का दायित्व और भी बढ़ जाता है।
आगे क्या होगा?
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या प्रभावित मतदाताओं को मतदान का अधिकार मिलता है। यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाती है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होती है, तो यह भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए एक उदाहरण बन सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे अंत तक संघर्ष करेंगे और अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगे, ताकि आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उनका मताधिकार सुरक्षित रहे।









