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हड़िया बेचने की मजबूरी से सालाना एक लाख की कमाई तक: मुन्नी देवी की प्रेरक कहानी

रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड अंतर्गत पुरबडीह गांव की रहने वाली मुन्नी देवी (पति: बालेश्वर महतो) की जीवनगाथा संघर्ष, साहस और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल है। कभी आर्थिक तंगी और सामाजिक उपेक्षा से जूझने वाली मुन्नी देवी आज अपने दम पर सालाना लगभग एक लाख रुपये की आमदनी अर्जित कर रही हैं। उनका यह सफर न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है।

कुछ वर्ष पहले तक मुन्नी देवी का जीवन बेहद कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था। पति की अनियमित आय के कारण घर चलाना मुश्किल था। गरीबी और अभाव ने उन्हें मानसिक रूप से भी कमजोर कर दिया था। हालात इतने खराब थे कि परिवार का पेट पालने के लिए उन्हें हड़िया-दारू बेचने जैसी गतिविधियों का सहारा लेना पड़ा। इसका असर उनके बच्चों के भविष्य और समाज में सम्मान पर भी पड़ रहा था। वे इस स्थिति से बाहर निकलना चाहती थीं, लेकिन सही मार्गदर्शन और अवसर का अभाव था।

उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई, जब झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के तहत गांव में महिलाओं को संगठित कर स्वयं सहायता समूह बनाए जा रहे थे। इसी पहल के तहत ‘कामधेनु महिला विकास संघ’ का गठन हुआ, जिसमें मुन्नी देवी भी एक सक्रिय सदस्य बनीं। समूह में कुल 12 महिलाएं जुड़ीं और सभी ने साप्ताहिक बचत की शुरुआत की।

समूह की नियमित बैठकों में भाग लेने से मुन्नी देवी का आत्मविश्वास धीरे-धीरे बढ़ने लगा। अन्य महिलाओं के साथ अपने अनुभव साझा करने से उनका संकोच दूर हुआ और उनमें नई ऊर्जा का संचार हुआ। इसी दौरान उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलने लगी। समूह की दीदी से उन्हें ‘फूलो झानो अभियान’ के बारे में पता चला, जिसके तहत लिए गए ऋण पर एक वर्ष तक कोई ब्याज नहीं देना होता है।

यह जानकारी उनके लिए उम्मीद की नई किरण साबित हुई। उन्होंने अपने जीवन को नई दिशा देने का निर्णय लिया और ‘फूलो झानो अभियान’ के तहत 15,000 रुपये का ऋण लिया। इसके साथ ही स्वयं सहायता समूह से 20,000 रुपये की अतिरिक्त राशि प्राप्त की। कुल 35,000 रुपये की इस पूंजी का उपयोग उन्होंने बेहद समझदारी से किया।

मुन्नी देवी ने ऋण की राशि का एक हिस्सा खेती को बेहतर बनाने में लगाया और शेष पैसों से छह बकरियां खरीदकर बकरी पालन का व्यवसाय शुरू किया। JSLPS के मार्गदर्शन और समूह के सहयोग से उन्होंने बकरी पालन की बारीकियों को सीखा और आधुनिक तरीके अपनाए। दिन-रात की मेहनत और लगन का परिणाम जल्द ही दिखने लगा। बकरियों की संख्या बढ़ी और खेती से भी बेहतर उत्पादन मिलने लगा।

आज मुन्नी देवी सालाना लगभग एक लाख रुपये की आमदनी कर रही हैं। उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब उनके बच्चों की पढ़ाई अच्छे स्कूल में हो रही है और परिवार में खुशहाली का माहौल है। समाज में भी उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।

एक समय जो महिला संकोच और अभाव में जीवन बिता रही थी, आज वह आत्मविश्वास से भरी एक सफल उद्यमी बन चुकी है। मुन्नी देवी अब अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाना चाहती हैं। उनका लक्ष्य है कि वे बकरी पालन के लिए एक व्यवस्थित गोट शेड बनवाएं और आधुनिक तकनीकों के साथ खेती का विस्तार करें।

मुन्नी देवी अपने जीवन में आए इस सकारात्मक परिवर्तन के लिए JSLPS और ‘फूलो झानो अभियान’ को दिल से धन्यवाद देती हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, सामूहिक सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है।

 

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