इंदौर, मध्य प्रदेश।
इंदौर के एमटीएच अस्पताल में बुधवार को एक अनोखा मामला सामने आया, जब एक बच्ची का जन्म हुआ, जिसके शरीर में दो सिर और एक धड़ था। इस दुर्लभ स्थिति को पैरापैगस डेसिफेल्स ट्विन्स कहा जाता है। इस नवजात बच्ची का वजन 2.8 किलोग्राम था और उसके शरीर में दो लिवर थे, लेकिन दिल एक ही था।
यह बच्ची देवास जिले के हरनगांव के पलासी की रहने वाली 22 साल की महिला के गर्भ से जन्मी थी। महिला को मंगलवार को गंभीर प्रसव पीड़ा के साथ अस्पताल लाया गया था। प्रसव पूर्व जांचों के दौरान किसी असामान्यता का पता नहीं चला था, हालांकि प्रसव के समय शारीरिक स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने सीजेरियन ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।
नवजात बच्ची की स्थिति
बच्ची की दुर्लभ स्थिति को देखते हुए अस्पताल में स्थित सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में उसे भर्ती कर लिया गया है। डॉक्टर्स के मुताबिक, इस तरह के मामलों में, जब एक निषेचित अंडाणु पूरी तरह से दो भ्रूणों में विभाजित नहीं हो पाता है, तो जुड़वां शिशु विकसित होते हैं, और इन भ्रूणों का कुछ हिस्सा आपस में जुड़ा रह जाता है। इस प्रक्रिया को पैरा-पैगस डेसिफेल्स ट्विन्स कहा जाता है, जो एक दुर्लभ विकासात्मक विसंगति होती है।
यह विसंगति संभवतः गर्भधारण के दूसरे या तीसरे सप्ताह में उत्पन्न होती है, और इसके परिणामस्वरूप दो भ्रूण एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं, जबकि उनके अंग अलग-अलग रूप से विकसित होते हैं। इस स्थिति में लिवर और सिर अलग-अलग होते हैं, लेकिन बाकी शरीर और अंग सामान्य रूप से जुड़े रहते हैं।
डॉक्टरों की टीम और ऑपरेशन
इस दुर्लभ डिलीवरी को लेकर एमटीएच अस्पताल की टीम ने तुरन्त और सटीक ऑपरेशन कर मां और बच्ची दोनों की जान बचाई। डॉ. निलेश दलाल, जो कि अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी हैं, और उनकी विशेषज्ञ टीम में डॉ. अल्का पटेल, डॉ. शीतल हेडाओ, डॉ. इंदरलता सोलंकी, डॉ. नेहा राजपूत और डॉ. दिव्या शामिल थे। सभी डॉक्टरों ने यह सुनिश्चित किया कि प्रसव के दौरान महिला और बच्ची की स्थिति को गंभीरता से देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
हॉस्पिटल की अधीक्षक और सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट, डॉ. अनुपमा दवे का कहना है कि इस तरह के मामलों में आमतौर पर कोई आनुवंशिक कारण नहीं होता है। यह प्राकृतिक विकास की एक विसंगति होती है, और इससे जुड़ी स्थिति किसी भी तरह से मां के स्वास्थ्य से संबंधित नहीं होती है।
आगे की चिकित्सा योजना
अब बच्ची की शारीरिक स्थिति को लेकर डॉक्टरों की टीम आगे की चिकित्सा रणनीतियों पर विचार कर रही है। डॉक्टरों का मुख्य उद्देश्य यह है कि बच्चे के शरीर के किसी हिस्से को अलग करने के बाद, क्या सभी अंग सामान्य रूप से काम कर पाएंगे या नहीं। इस मामले में सर्जन, शिशु रोग विशेषज्ञ, और इमेजिंग विशेषज्ञों की एक टीम बच्ची के शारीरिक बनावट और जटिलता के आधार पर सर्जरी की योजना तय करेगी।
यह एक गंभीर मामला है, लेकिन डॉक्टरों को उम्मीद है कि बच्ची के साथ सभी प्रक्रियाएं सुरक्षित रूप से पूरी की जा सकेंगी।
हालांकि यह एक अत्यंत दुर्लभ घटना है, जहां दो सिर और दो लिवर होते हुए भी एक ही धड़ और दिल के साथ बच्ची का जन्म होता है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की मदद से ऐसे मामलों में उम्मीद से अधिक सफलताएं भी मिली हैं। फिलहाल, एमटीएच अस्पताल के डॉक्टरों की टीम पूरी तरह से बच्ची के इलाज और उसके भविष्य के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाए हुए है।









