रामगढ़। स्वच्छता और जनसुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाले प्रशासन की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। रामगढ़ प्रखंड मुख्यालय परिसर में लाखों रुपये की लागत से निर्मित सार्वजनिक शौचालय एवं स्नानागार वर्षों से बंद पड़ा है, जिससे प्रतिदिन यहां आने वाले सैकड़ों लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे को लेकर भाजपा ने जिला प्रशासन और नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए तत्काल समाधान की मांग की है।
रामगढ़ प्रखंड मुख्यालय जिले का सबसे व्यस्त सरकारी परिसर माना जाता है, जहां प्रतिदिन प्रखंड कार्यालय, अंचल कार्यालय और अनुमंडल न्यायालय में कार्य के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, महिलाएं, बुजुर्ग और दिव्यांग पहुंचते हैं। बावजूद इसके, परिसर में मौजूद सार्वजनिक शौचालय पर ताला लटका हुआ है। ऐसे में लोगों को मजबूरन खुले में शौच या अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं का सहारा लेना पड़ता है।
स्थानीय दुकानदार और समाजसेवी अरबिंद प्रसाद ने बताया कि प्रतिदिन 500 से अधिक लोग इस परिसर में आते हैं। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। कई बार अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी राजीव पामदत्त ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि प्रखंड मुख्यालय जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर सार्वजनिक शौचालय का बंद रहना प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आम जनता को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार शौचालय का निर्माण पूरा होने के बाद उसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी किसी एजेंसी को नहीं सौंपी गई। पानी और सफाईकर्मियों की व्यवस्था नहीं होने के कारण नगर परिषद ने उस पर ताला लगा दिया, जो आज तक नहीं खुल सका।
भाजपा ने नगर परिषद प्रशासन और जिला प्रशासन से सात दिनों के भीतर शौचालय-स्नानागार को आम जनता के लिए शुरू करने तथा उपायुक्त से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।








