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देहरादून की अरबों की शत्रु संपत्तियों पर भू-माफियाओं की नजर, अब सरकार हुई सख्त

उत्तराखंड में लंबे समय से ठंडी पड़ी शत्रु संपत्तियों की फाइलें एक बार फिर खुलने लगी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कर दिया है कि प्रदेश सरकार इन संपत्तियों पर से अवैध कब्जे हटाकर उन्हें जनहित में उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में केंद्रीय गृह मंत्रालय से भी सख्त निर्देश जारी हुए हैं कि जिलाधिकारी ऐसी संपत्तियों को अपने कब्जे में लेकर मंत्रालय को रिपोर्ट करें।

 फैज़ मोहम्मद की अरबों की शत्रु संपत्ति

राज्य में सबसे चर्चित शत्रु संपत्ति फैज़ मोहम्मद के नाम से दर्ज है। जानकारी के अनुसार देहरादून के टर्नर रोड पर लगभग 70 बीघा भूमि शत्रु संपत्ति के रूप में चिन्हित है। इसके अलावा माजरा क्षेत्र में करीब 1800 बीघा जमीन भी फैज़ मोहम्मद के नाम से दर्ज बताई जाती है। इन दोनों संपत्तियों की कीमत अरबों रुपये आंकी गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इन्हें सूचीबद्ध भी कर रखा है।

लेकिन इन संपत्तियों पर पिछले कई वर्षों से सहारनपुर और मुजफ्फरनगर के भू-माफियाओं का कब्जा बताया जा रहा है। आरोप है कि फर्जी वारिसान और दस्तावेजों के आधार पर इन जमीनों पर कब्जे किए गए हैं। यहाँ तक कि फर्जी रजिस्ट्री तक करा दी गई। प्रशासनिक स्तर पर कई बार जांच हुई, मौके का निरीक्षण भी हुआ, लेकिन अचानक फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाती थीं।

 नैनीताल से शुरू हुआ अभियान

मुख्यमंत्री धामी ने कहा है कि सरकार ने नैनीताल स्थित मेट्रोपोल होटल शत्रु संपत्ति को खाली करवा लिया है और इसे पार्किंग के उपयोग के लिए अनुमति दी गई है। इसी तर्ज पर अब देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर में चिन्हित शत्रु संपत्तियों को भी कब्जामुक्त कराया जाएगा।

गौरतलब है कि उत्तराखंड बनने के बाद भी लंबे समय तक देहरादून और हरिद्वार की जमीनों के राजस्व दस्तावेज सहारनपुर कमिश्नरी में पड़े रहे। भू-माफियाओं ने वहीं से पुराने कागजों में फर्जीवाड़ा कर कब्जे जमाने की कोशिशें जारी रखीं। कुछ साल पहले देहरादून की तत्कालीन जिलाधिकारी सोनिका ने इन मूल दस्तावेजों को मंगवाया था, जिसके बाद कई माफियाओं पर कार्रवाई भी हुई।

देशभर में लाख करोड़ की संपत्ति

केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में करीब 12,611 शत्रु संपत्तियां चिन्हित हैं। इनकी अनुमानित कीमत लगभग एक लाख करोड़ रुपये है। इनमें से 12,485 संपत्तियां उन लोगों की हैं जो बंटवारे के दौरान पाकिस्तान जाकर बस गए, जबकि 126 संपत्तियां उन लोगों की हैं जिन्होंने चीन की नागरिकता ले ली।

उत्तराखंड में ऐसी कुल 34 संपत्तियां चिन्हित हैं। इनमें से बड़ी संख्या में देहरादून और आसपास के जिलों में हैं। धामी सरकार ने साफ कहा है कि सभी शत्रु संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराकर सार्वजनिक हित में उपयोग किया जाएगा।

अवैध वारिस और कानूनी कार्रवाई

शत्रु संपत्तियों पर कब्जा जमाने का सबसे बड़ा तरीका फर्जी वारिस बनाना बताया जाता है। जो लोग पाकिस्तान या अन्य देशों में बस गए, उनके नाम पर यहां फर्जी रिश्तेदार खड़े कर दिए गए और संपत्ति पर दावा कर दिया गया। स्थानीय अदालतों में ऐसे कई मुकदमे चल रहे हैं। अब गृह मंत्रालय ने इन मामलों में भी कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है।

सरकार का दावा है कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड की सभी शत्रु संपत्तियों को पूरी तरह कब्जामुक्त कर राज्य हित में इस्तेमाल किया जाएगा।

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