कोटद्वार। उत्तराखंड पुलिस का मानवीय चेहरा एक बार फिर सामने आया है। कोटद्वार के कलालघाटी पुलिस चौकी क्षेत्र में अकेले जीवन बिता रहे 85 वर्षीय बुजुर्ग साधुराम के निधन के बाद पुलिसकर्मियों ने बेटों का फर्ज निभाते हुए उनका पूरे धार्मिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कराया। इस संवेदनशील पहल की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है।
जानकारी के अनुसार, कोटद्वार कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत सिडकुल इलाके के फैक्ट्री तिराहे के पास एक झोपड़ी में साधुराम अकेले रहते थे। उनका कोई सगा-संबंधी नहीं था और वे लंबे समय से एकाकी जीवन व्यतीत कर रहे थे। स्थानीय पुलिस उन्हें समय-समय पर मदद पहुंचाती थी और जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती भी कराती रही थी।
शनिवार को पुलिस को सूचना मिली कि साधुराम का निधन हो गया है। सूचना मिलते ही कलालघाटी चौकी में तैनात हेड कांस्टेबल सुशील कुमार, चमन कुमार, संजय पाल सिंह नेगी, अनिल राणा और रविंद्र भट्ट मौके पर पहुंचे। बुजुर्ग का कोई परिजन न होने के कारण पुलिसकर्मियों ने स्थानीय नागरिकों के सहयोग से अंतिम संस्कार की पूरी जिम्मेदारी अपने हाथों में ली।
पुलिस टीम ने न केवल शव को सम्मानपूर्वक श्मशान पहुंचाया, बल्कि धार्मिक विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार भी कराया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को भावुक कर गया। स्थानीय लोगों ने कहा कि पुलिस ने जिस तरह संवेदनशीलता दिखाई, वह समाज के लिए मिसाल है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी पुलिसकर्मियों के इस मानवीय कार्य की सराहना की है। यह घटना बताती है कि पुलिस सिर्फ कानून व्यवस्था संभालने तक सीमित नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में सहारा बनने का काम भी करती है।








