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झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 संविधान पर प्रहार

लोकतंत्र की हत्या और 2 राष्ट्रनायकों का अपमान: नितेश कुमार मोदी

रामगढ़। रामगढ़ के छात्र नेता नितेश कुमार मोदी ने झारखंड सरकार द्वारा प्रस्तुत झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2025 को राज्य की उच्च शिक्षा प्रणाली पर राजनीतिक नियंत्रण थोपने तथा संवैधानिक पदों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला खतरनाक कदम बताया है। नितेश मोदी ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से राज्य सरकार विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्रतिकुलपति, वित्तीय सलाहकार जैसे महत्वपूर्ण पदों की नियुक्ति का अधिकार अपने पास केंद्रित कर रही है। जबकि संविधान के अनुसार यह अधिकार अब तक राज्यपाल, जो विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति होते हैं, के अधीन रहा है। यह सीधे-सीधे संविधान,उच्च शिक्षा की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर हमला व राजनीतीकरण है।उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य को राजनीतिक प्रयोगशाला बना रहे हैं,जहाँ शिक्षा का उद्देश्य गुणवत्ता नहीं, सत्ता-संतुलन का साधन बनता जा रहा है जहां राष्ट्रनायकों के नाम और सम्मान से छेड़छाड़ कर एक सुनियोजित साजिश रची जा रही है।
नितेश कुमार मोदी ने कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब झारखंड में राष्ट्रनिर्माताओं के नामों को मिटाने का प्रयास हुआ है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जिन्होंने कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाए रखने में प्राण न्यौछावर किए, उनके नाम से जुड़ी संस्थाओं को लगातार निशाना बनाया गया।
अब भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी, जिनके नेतृत्व में झारखंड राज्य की स्थापना हुई, उनके नाम को विकास योजनाओं से हटाया जा रहा है। यह किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रवादी चेतना, संवैधानिक मूल्यों और झारखंड की अस्मिता पर हमला है।छात्रों की ओर से स्पष्ट माँगें है पहला मांग झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 को तुरंत निरस्त किया जाए। दूसरा मांग राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका तथा विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को अक्षुण्ण रखा जाए। तीसरा मांग डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अटल बिहारी वाजपेयी जी के नाम व योगदान से कोई छेड़छाड़ न की जाए। उनका सम्मान सुरक्षित रखा जाए। नितेश मोदी ने अंत में कहा कि
यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की आत्मा पर आघात है। यदि राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने समय रहते इस पर ठोस कार्यवाही नहीं की, तो पूरे झारखंड में छात्र समुदाय व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होगा। क्योंकि अब चुप्पी भी राष्ट्रद्रोह के समान है।

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