देहरादून। देवभूमि आयुर्वेद एवं चिकित्सालय के 60 बी.ए.एम.एस. युवा आयुर्वेद चिकित्सकों ने हिमालय वेलनेस का दौरा किया। इस दौरान छात्रों ने औषधीय पौधों की खेती व पहचान हेतु हर्बल गार्डन, संग्रहालय, कच्चे माल का भंडार तथा गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं का अवलोकन किया।
हिमालय वेलनेस के अध्यक्ष डॉ. एस. फारूक ने युवा चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत दुनिया में आयुर्वेदिक औषधियों का सबसे बड़ा उत्पादक है और हर्बल उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक बनकर उभरा है। उन्होंने बताया कि विश्व स्तर पर उपयोग होने वाली लगभग 25% औषधियाँ पौधों से प्राप्त होती हैं, जो प्राकृतिक उपचार की प्रासंगिकता को दर्शाती है।
डॉ. फारूक ने कहा कि अमेरिका द्वारा हर्बल फार्मा उत्पादों पर लगाए जा रहे टैरिफ निर्यातकों के लिए चुनौती हैं। ये लागत बढ़ा सकते हैं और आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित कर सकते हैं, जबकि अमेरिकी वेलनेस बाज़ार का आकार 2023 में लगभग 13 बिलियन डॉलर तक पहुँच चुका है।
उन्होंने कहा – “दुनिया प्रकृति की ओर लौट रही है। भारत वैश्विक हर्बल वेलनेस केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। हल्दी, अश्वगंधा और मोरिंगा जैसे उत्पाद निर्यात को बढ़ावा दे रहे हैं और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में भारतीय आयुर्वेदिक न्यूट्रास्युटिकल्स अपनी मजबूत पकड़ बना रहे हैं।”
इस अवसर पर डॉ. आकांक्षा दुप्ता और डॉ. इरिना एस. चंद्रन ने उद्योग व शिक्षा के समन्वय को सराहते हुए डॉ. फारूक का आभार व्यक्त किया।








