पूरे सियासी घटनाक्रम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले से अधिक हुए मजबूत
नाराजगी को हवा देने वाले सांसदों के राजनीतिक भविष्य पर कयासबाजी तेज हुई
अमर नाथ सिंह
देहरादून। उत्तराखंड भाजपा के भीतर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ मुखर रहे गदरपुर के विधायक अरविंद पांडेय के सुर अचानक बदल गए हैं। लगातार अपनी ही सरकार को घेरे में ले रहे और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री के इन बदले तेवरों को भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के कड़े रुख का नतीजा माना जा रहा है। सियासी गलियारों में इसके साफ अर्थ निकाले जा रहे हैं कि भाजपा हाईकमान राज्य में किसी भी स्तर की गुटबाजी या अनुशासनहीनता बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। राष्ट्रीय नेतृत्व की इस सख्ती के बाद मुख्यमंत्री धामी को कमजोर करने या उनके खिलाफ माहौल बनाने की जो कोशिशें चल रही थीं, उन पर फिलहाल पूरी तरह विराम लग गया है।
अरविंद पांडेय की नाराजगी को हवा देने और उनके आवास पर जाकर एकजुटता दिखाने वाले दो दिग्गज सांसदों अनिल बलूनी और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी कयासबाजी तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा हाईकमान इन दोनों बड़े नेताओं पर सीधे तौर पर कोई दंडात्मक या सार्वजनिक एक्शन नहीं लेगा, लेकिन अंदरूनी तौर पर उन्हें कड़ा संदेश दे दिया गया है। अनुशासनप्रिय मानी जाने वाली भाजपा में आंतरिक लोकतंत्र के नाम पर गुटबाजी को बढ़ावा देने वाले नेताओं की सांगठनिक ‘क्लास’ लगना तय माना जाता है। ऐसे में इन सांसदों को भविष्य में पार्टी के भीतर मिलने वाली महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों या फैसलों में दरकिनार कर अपनी नाराजगी जता सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम से एक बात पूरी तरह साफ हो गई है कि उत्तराखंड भाजपा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत होकर उभरी है। प्रदेश संगठन महामंत्री अजय कुमार के तबादले और बागी सुरों के अचानक शांत होने से यह स्पष्ट है कि केंद्रीय नेतृत्व धामी सरकार को पूरी स्थिरता और मजबूती देना चाहता है। जो धामी विरोधी हवा कुछ समय पहले तक राज्य की सियासत को गरमा रही थी, वह हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद पूरी तरह ठंडी पड़ चुकी है। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए पार्टी अब किसी भी तरह के आंतरिक कलह को जल्द से जल्द खत्म कर एकजुटता का संदेश देने की रणनीति पर काम कर रही है।








