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आपदा में कैसे जुटा पूरा प्रशासन? डॉ. धन सिंह रावत ने क्या कहा ग्राउंड रिपोर्ट पर?

देहरादून। उत्तराखंड में जारी भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने एक बार फिर लोगों को झकझोर कर रख दिया है। श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के पाबौं और थलीसैंण ब्लॉकों के कई गांवों में प्रकृति का तांडव देखने को मिला है। कई स्थानों पर भारी भूस्खलन और जलभराव के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस आपदा को लेकर गहरी चिंता जताई है और कहा है कि सरकार प्रभावित लोगों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। उन्होंने बताया कि पाबौं ब्लॉक के बुंरासी, फल्दवाड़ी, मनखोली और थलीसैंण ब्लॉक के कफल्ड, मरोड़ा, भरनौ, भैड़गांव, कल्याणखाल, बूंगीधार, मैरवा, पापतोली, भैसवाड़ा, कुणेथ, मैखुली व सासों गांव में भारी नुकसान की खबरें सामने आई हैं।

डॉ. रावत ने जानकारी दी कि इन क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। प्रशासन, आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंच रही हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है।

उन्होंने जिलाधिकारी से सीधी बातचीत कर स्थिति का जायज़ा लिया और सभी ज़रूरी संसाधनों को प्राथमिकता के आधार पर सक्रिय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में हर संभव मदद पीड़ितों को दी जा रही है और सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।

बुंरासी गांव की त्रासदी पर विशेष रूप से दुख प्रकट करते हुए डॉ. रावत ने बताया कि वहां भूस्खलन की चपेट में आने से दो लोगों की मलबे में दबकर मौत हो गई। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन उनके साथ है और हर जरूरी सहायता दी जाएगी।

डॉ. रावत ने यह भी बताया कि हेल्पलाइन नंबर सक्रिय कर दिए गए हैं और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वह सभी ग्रामीणों से संपर्क में रहे। खाद्य सामग्री, पीने का साफ पानी, दवाएं और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था हर गांव में की जा रही है।

राज्य सरकार की तत्परता और डॉ. रावत की निगरानी में राहत कार्यों में तेजी लाई गई है। उन्होंने जनता से भी अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें। इस भीषण आपदा के बीच उम्मीद की एक किरण यह है कि सरकारी मशीनरी पूरी तरह सक्रिय है और मंत्री खुद मोर्चा संभाले हुए हैं। ऐसे में पीड़ितों को थोड़ी राहत जरूर महसूस हो रही है।

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