10.18 करोड़ महिलाओं की जांच की गई
नई दिल्ली: भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देशभर में 30 वर्ष और उससे अधिक आयु की 10.18 करोड़ से अधिक महिलाओं की गर्भाशय ग्रीवा (सर्विकल) कैंसर की जांच की है। यह सफलता राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (एएएम) के माध्यम से गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की स्क्रीनिंग, रोकथाम और प्रबंधन के लिए किए जा रहे जनसंख्या-आधारित प्रयासों का हिस्सा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने शुक्रवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की स्क्रीनिंग को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए 20 फरवरी से 31 मार्च 2025 तक एक समयबद्ध एनसीडी स्क्रीनिंग अभियान भी शुरू किया था, जिसकी सफलता ने इस उपलब्धि को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
महत्वपूर्ण आंकड़े
राष्ट्रीय एनसीडी पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई 2025 तक, 30 वर्ष और उससे अधिक आयु की 25.42 करोड़ महिलाओं की पात्र आबादी में से 10.18 करोड़ महिलाओं की गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के लिए जांच की गई है। यह आंकड़ा न केवल स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भी प्रमाणित करता है कि देश में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच में बढ़ोतरी हो रही है, जो एक महत्वपूर्ण कदम है।
स्क्रीनिंग की प्रक्रिया और रणनीति
इस पहल के तहत 30 से 65 वर्ष की आयु की महिलाओं को शामिल किया गया है। इन महिलाओं की स्क्रीनिंग मुख्य रूप से एसिटिक एसिड (वीआईए) के साथ दृश्य निरीक्षण पद्धति से की जाती है। यह प्रक्रिया उप-स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा की जाती है। वीआईए पॉजिटिव मामलों को आगे के नैदानिक मूल्यांकन के लिए उच्च चिकित्सा केंद्रों में भेजा जाता है, जहां इनकी जांच और इलाज की प्रक्रिया जारी रहती है।
इस पहल में जमीनी स्तर पर मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आशा कार्यकर्ता समुदाय में महिला स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाती हैं और जोखिमग्रस्त महिलाओं की पहचान करती हैं। इसके बाद, आशा कार्यकर्ता महिलाओं को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नियमित स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग में भाग लेने के लिए प्रेरित करती हैं। यह एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें सरकारी स्वास्थ्य अधिकारियों के अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का भी अहम योगदान है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की भूमिका
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एनसीडी के खिलाफ देशव्यापी जागरूकता अभियान को महत्वपूर्ण माना है। यह अभियान आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (एएएम) के माध्यम से चलाया जाता है, जो न केवल गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग करते हैं, बल्कि रोकथाम और प्रबंधन में भी योगदान देते हैं। इस पहल के तहत, सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र ने बड़ी संख्या में महिलाओं तक पहुंचने और उन्हें स्वास्थ्य जांच के लिए प्रोत्साहित करने में सफलता पाई है।
केंद्र सरकार की यह पहल भारत में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने और इसके रोकथाम में बड़ा कदम साबित हो रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने आशा जताई है कि आने वाले समय में और अधिक महिलाओं तक यह सेवा पहुंचाई जाएगी और कैंसर जैसी बीमारियों के प्रबंधन में सफलता मिलेगी।
उद्देश्य और भविष्य की दिशा
स्वास्थ्य मंत्रालय का उद्देश्य हर महिला को गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की प्रारंभिक पहचान के माध्यम से बेहतर उपचार की सुविधाएं प्रदान करना है। इसके लिए सरकार ने कई योजनाएं बनाई हैं, जिनके तहत कम खर्च में प्रभावी चिकित्सा सेवाएं दी जा रही हैं। अब तक किए गए प्रयासों ने यह साबित किया है कि यदि समय रहते पहचान और इलाज किया जाए, तो कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव संभव है।
स्वास्थ्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि इस अभियान की सफलता के बाद, सरकार अन्य गैर-संचारी रोगों की जांच और प्रबंधन के लिए भी इसी प्रकार के अभियानों को बढ़ावा देने की योजना बना रही है।
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