हरिद्वार। उत्तराखंड पुलिस के ऑपरेशन कालनेमि अभियान के तहत थाना पिरान कलियर पुलिस ने फर्जी बाबाओं पर एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और नकली बाबाओं को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक आरोपी बाबा पिछले बीस वर्षों से लापता था और परिजनों को उसके जीवित होने की कोई आशा नहीं थी। पुलिस की इस कार्रवाई ने न केवल फर्जी बाबाओं के नेटवर्क को उजागर किया है, बल्कि वर्षों पुरानी गुमशुदगी के रहस्य से भी पर्दा हटाया है।
क्या है ऑपरेशन कालनेमि?
उत्तराखंड पुलिस द्वारा हाल ही में शुरू किया गया ‘ऑपरेशन कालनेमि’ एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य धार्मिक भेष में छिपे फर्जी बाबाओं, अपराधियों और धोखेबाजों की पहचान व गिरफ्तारी करना है। इस अभियान के तहत राज्यभर में अब तक 100 से अधिक फर्जी बाबाओं की गिरफ्तारी की जा चुकी है। पिरान कलियर, हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे तीर्थ क्षेत्रों में इसे विशेष रूप से लागू किया गया है।
गिरफ्तार हुए फर्जी बाबा
थाना पिरान कलियर पुलिस ने नियमित चेकिंग के दौरान तीन व्यक्तियों को बाबा के भेष में संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाया। पूछताछ और दस्तावेजों की मांग पर तीनों में से कोई भी विश्वसनीय पहचान पत्र या प्रमाण नहीं दिखा सका।
1. जितेन्द्र (40 वर्ष)
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पुत्र: कुंवरपाल
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निवासी: थाना दलपतपुर, जिला बिलारी, उत्तर प्रदेश
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विशेष तथ्य: कोई पहचान पत्र नहीं दिखा सका, न ही घर का सही पता दे पाया। जब बिलारी थाने से जांच कराई गई तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जितेन्द्र वर्ष 2005 से लापता था।
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परिजनों की प्रतिक्रिया: पुलिस द्वारा जब घरवालों से संपर्क किया गया, तो परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्हें 20 वर्षों से उसकी कोई खबर नहीं थी, और उन्होंने मान लिया था कि वह अब जीवित नहीं है।
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स्थिति: पुलिस ने जितेन्द्र को दस्तावेज सत्यापन के बाद उसके परिजनों को सौंप दिया।
2. जैद (21 वर्ष)
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पुत्र: गुलजार
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निवासी: नवाबगंज, मदीना मस्जिद के पास, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश
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स्थिति: बाबा का भेष धारण कर कलियर में घूम रहा था, कोई ठोस पहचान या धार्मिक संस्था से जुड़ाव नहीं मिला।
3. रण सिंह (56 वर्ष)
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पुत्र: कलिराम
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निवासी: हीरा सिंह, थाना सदर, अम्बाला, उत्तर प्रदेश
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स्थिति: धार्मिक चोला पहनकर चंदा एकत्र करता पाया गया। कोई आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया।
पुलिस का बयान
थाना पिरान कलियर प्रभारी ने बताया कि,
“तीनों व्यक्तियों की गतिविधियां संदिग्ध थीं। पूछताछ में ये स्पष्ट हो गया कि इनका किसी धार्मिक संस्था से संबंध नहीं है और ये आमजन को धार्मिक प्रवचन या चमत्कारों के नाम पर गुमराह कर रहे थे। ऑपरेशन कालनेमि के अंतर्गत ऐसी कार्रवाइयाँ आगे भी जारी रहेंगी।”
धार्मिक आस्थाओं से धोखा
तीनों आरोपी बाबा के भेष में श्रद्धालुओं को भ्रमित कर रहे थे, जो तीर्थनगरी की पवित्रता के साथ सीधा धोखा है। कई स्थानीय लोगों का मानना है कि ये लोग चंदा, ठगी, और निजी स्वार्थ के लिए धर्म का सहारा लेते हैं।
स्थानीय निवासी रईस अहमद ने कहा,
“धार्मिक स्थानों की पवित्रता बचाए रखने के लिए ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई ज़रूरी है। ये हमारी आस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।”
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ संदिग्ध गतिविधियों, पहचान छिपाने और धोखाधड़ी की संभावित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। इनकी पृष्ठभूमि की जांच की जा रही है और यदि किसी पर पूर्व में आपराधिक रिकॉर्ड पाया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
(ऑपरेशन कालनेमि के तहत आगे भी ऐसे फर्जी बाबाओं पर कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस आम जनता से भी अपील कर रही है कि वे संदिग्ध व्यक्तियों की जानकारी तत्काल पुलिस को दें।)








