Dehradun। Jigyasa University के स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज़ द्वारा “फार्मास्यूटिकल साइंसेज़ में बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR): नवीन प्रवृत्तियां, उभरते नवाचार एवं उच्च शिक्षा में शोध व शैक्षणिक प्रक्रियाओं पर प्रभाव” विषय पर यूकॉस्ट प्रायोजित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में फार्मा उद्योग और अकादमिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लेकर छात्रों और शोधार्थियों को IPR के महत्व से अवगत कराया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि S. Farooq, प्रेसिडेंट, Himalaya Drug Company, ने अपने संबोधन में कहा कि फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में तेजी से हो रहे नवाचारों की सुरक्षा के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि IPR न केवल शोधकर्ताओं को उनके आविष्कारों का कानूनी अधिकार दिलाता है, बल्कि उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को भी मजबूत बनाता है।
कार्यक्रम का आयोजन कुलपति Shankar Ramamoorthy के मार्गदर्शन में किया गया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि उच्च शिक्षा और शोध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए IPR की समझ आज के समय में अनिवार्य हो गई है। उन्होंने छात्रों को नवाचार और पेटेंट के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों में M. L. Joshi, Shivanand Patil तथा Tribhuvan Semwal ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि फार्मा उद्योग में प्रतिस्पर्धा के इस दौर में शोध और नवाचार की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।
कार्यशाला में आमंत्रित विशेषज्ञ वक्ताओं—Atul Kaushik, Rahul Taneja, Ram Kishore Kushwaha और Himanshu Goyal—ने पेटेंट फाइलिंग की प्रक्रिया, नवाचार संरक्षण और फार्मास्यूटिकल रिसर्च में उभरते रुझानों पर विस्तृत व्याख्यान दिए। कार्यक्रम में छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए, जिससे कार्यशाला अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक सिद्ध हुई।








