नई दिल्ली, भारत मंडपम में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते प्रभाव पर गंभीरता से विचार रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एआई का विकास जिम्मेदारीपूर्ण और मानव-केन्द्रित होना चाहिए, ताकि यह तकनीक वैश्विक भलाई का माध्यम बन सके, न कि असमानता का कारण।
अपने संबोधन में मैक्रों ने भारत के डिजिटल परिवर्तन की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने डिजिटल पहचान, हेल्थ आईडी और भुगतान प्रणालियों के माध्यम से जो समावेशी ढांचा तैयार किया है, वह एक सभ्यता की कहानी कहता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया के किसी भी देश या कंपनी को किसी राष्ट्र को केवल बाजार या डेटा स्रोत के रूप में देखने का अधिकार नहीं है। एआई के क्षेत्र में रणनीतिक स्वायत्तता और स्वतंत्रता अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि एआई उत्पादकता बढ़ाने और रोजगार बाजार को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, लेकिन यह तभी संभव है जब तकनीक सभी के लिए सुलभ और भाषाई रूप से विविध हो। इस दिशा में भारत और फ्रांस मिलकर काम करेंगे। अपने भाषण का समापन उन्होंने ‘जय हो’ कहकर किया, जिससे सभागार तालियों से गूंज उठा।
मैक्रों ने डिजिटल दुरुपयोग और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि फ्रांस 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। उन्होंने अन्य देशों से भी इस पहल में सहयोग की अपील की और उम्मीद जताई कि भारत भी बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के लिए इस दिशा में ठोस कदम उठाएगा।
उन्होंने कहा कि वैश्विक तनाव के इस दौर में विभाजन नहीं, बल्कि ‘ब्रिजिंग’ यानी सेतु निर्माण की आवश्यकता है। एआई के युग में एकजुटता ही प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगी।








