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जिज्ञासा विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा पर फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का समापन, विशेषज्ञों ने बताए शिक्षा के नए आयाम

देहरादून।  देहरादून स्थित  जिज्ञासा विश्वविद्यालय  में “उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा दृष्टिकोण” विषय पर आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व, उसकी प्रासंगिकता और आधुनिक शिक्षा व शोध में उसके समावेशन पर गंभीर अकादमिक चर्चा को बढ़ावा देना था।

समापन समारोह को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति  प्रो. (डॉ.) शंकर रामामूर्ति  ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल हमारी ऐतिहासिक धरोहर नहीं है, बल्कि यह आज के समय में शिक्षा और अनुसंधान के लिए भी अत्यंत प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली में जीवन, प्रकृति और समाज के संतुलन का गहरा दृष्टिकोण निहित है, जिसे आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ जोड़ना बेहद आवश्यक है।

उन्होंने प्रतिभागी शिक्षकों से आह्वान किया कि वे भारतीय ज्ञान प्रणाली के मूल्यों और सिद्धांतों को अपने शिक्षण और शोध कार्यों में शामिल करें। इससे विद्यार्थियों को केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि मूल्य आधारित और समग्र शिक्षा भी प्राप्त होगी।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों ने भारतीय ज्ञान परंपरा के अनेक आयामों—दर्शन, विज्ञान, संस्कृति और शिक्षा—पर विस्तार से व्याख्यान दिए। इन सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को भारतीय ज्ञान प्रणाली की गहन समझ प्राप्त हुई और यह भी बताया गया कि किस प्रकार इसे आधुनिक शिक्षा और शोध के साथ जोड़ा जा सकता है।

समापन सत्र में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार (प्रभारी)  डॉ. योगेश नंदा ,  प्रो. (डॉ.) सुरेश चंद्र नायक ,  प्रो. (डॉ.) अजय जोशी  और  डॉ. मोहम्मद फैसल  सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण और प्रतिभागी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन सुश्री प्रेरणा ध्यानी ने किया और अंत में सभी अतिथियों व प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। विश्वविद्यालय परिवार ने इस सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे अकादमिक कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

 

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