---Advertisement---

उत्तराखंड में ‘दायित्वों’ का दंगल: तैयार है धामी की नई टीम!

  मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब भाजपा कार्यकर्ताओं को जल्द ही बंटेंगे सत्ता के मलाईदार पद!
  वरिष्ठ नेताओं की सूची पर अंतिम दौर की चर्चा, दिल्ली हाईकमान की अंतिम मुहर बाकी
 बीस से अधिक बोर्डों और निगमों में अध्यक्षों की नियुक्तियां अगले सप्ताह संभव
 पुराने वफादार कार्यकर्ताओं और पूर्व विधायकों को प्राथमिकता के आधार पर पद दिए जाएंगे
 संगठन के भीतर असंतोष रोकने के लिए मुख्यमंत्री धामी फूंक-फूंक कर रख रहे कदम

 अमरनाथ सिंह, देहरादून।

उत्तराखंड की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब सबकी नजरें उन ‘लाल बत्ती’ पदों पर टिकी हैं जिन्हें सरकार और संगठन के बीच सामंजस्य का सबसे बड़ा जरिया माना जाता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट के खाली पदों को भरकर क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने की सफल कोशिश की है, लेकिन असली चुनौती अब उन वरिष्ठ नेताओं और पूर्व विधायकों को संतुष्ट करने की है जो लंबे समय से हाशिए पर रहकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि दायित्वों के बंटवारे की पहली सूची लगभग तैयार हो चुकी है और इसमें उन चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है जो 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं। इस बार चयन का आधार केवल वफादारी नहीं बल्कि संबंधित नेता की अपने क्षेत्र में पकड़ और जनता के बीच उसकी स्वीकार्यता को बनाया गया है।
सत्ता के गलियारों में जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है उनमें पूर्व विधायकों और संगठन के पुराने धुरंधरों का दबदबा दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, बंशीधर भगत (जिन्हें किसी बड़े बोर्ड की जिम्मेदारी मिल सकती है), और देशराज कर्णवाल जैसे नामों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही संगठन से जुड़े सुरेश भट्ट, देवेंद्र भसीन, कुलदीप कुमार और अजेय कुमार जैसे रणनीतिकारों को भी महत्वपूर्ण आयोगों या निगमों में अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है ताकि सरकार के कामकाज को बौद्धिक और सांगठनिक धार दी जा सके। कुमाऊं क्षेत्र से दान सिंह रावत, मझिलाल और कैलाश शर्मा जैसे अनुभवी चेहरों को भी इस सूची में शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है। मुख्यमंत्री धामी इस बार किसी भी तरह की जल्दबाजी के मूड में नहीं हैं क्योंकि हाल ही में कुछ पुराने नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने की खबरों ने भाजपा खेमे को सतर्क कर दिया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दायित्वों का यह बंटवारा केवल पद बांटने की प्रक्रिया नहीं बल्कि असंतोष को थामने की एक सोची-झीली कवायद है। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में पार्टी अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहती है, इसलिए यहां के कद्दावर नेताओं को विशेष तौर पर तरजीह दी जा सकती है। चर्चा यह भी है कि महिला मोर्चा और युवा मोर्चा के उन पदाधिकारियों को भी छोटे बोर्डों में जगह दी जाएगी जिन्होंने बीते चुनावों में बूथ स्तर पर कड़ी मेहनत की थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि दायित्व उन्हीं को मिलेंगे जिनकी ‘परफॉरमेंस रिपोर्ट’ बेहतर होगी। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं को निगमों के माध्यम से जनता तक पहुंचाना और कार्यकर्ताओं में यह विश्वास पैदा करना है कि सरकार उनके साथ खड़ी है। अगले कुछ ही दिनों में राजभवन से निकलने वाली नियुक्ति की चिट्ठियां उत्तराखंड की राजनीति का अगला रुख तय करेंगी।

Related Post