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बाढ़ के बावजूद शिवभक्तों का उमड़ा सैलाब, श्रावण के अंतिम सोमवार को जलाभिषेक के लिए टूट पड़ा जनसैलाब!

प्रयागराज। श्रावण मास का चौथा और अंतिम सोमवार, आस्था और श्रद्धा का चरम दृश्य लेकर आया। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बाढ़ जैसे हालात होने के बावजूद शिवभक्तों ने देवों के देव महादेव का जलाभिषेक करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सुबह से ही पूरे शहर में “बोल बम“, “हर हर महादेव” के जयघोष गूंजते रहे और शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।

शहर में यमुना और गंगा नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। दशाश्वमेध घाट स्थित प्रसिद्ध ब्रह्मेश्वर महादेव मंदिर की सीढ़ियां पूरी तरह जलमग्न हैं, लेकिन भक्तों का उत्साह जरा भी कम नहीं दिखा। जलभराव के बावजूद लोग गंगाजल लेकर मंदिर तक पहुंच रहे हैं और आस्था की मिसाल पेश कर रहे हैं।

श्रावण मास के इस विशेष दिन पर, नागवासुकी मंदिर, कोटेश्वर महादेव, ललितेश्वर महादेव, मनकामेश्वर महादेव, फूटा हवन महादेव, पांडेश्वर महादेव, नरकेश्वर महादेव, तक्षक मंदिर और बेणी माधव मंदिर जैसे शहर के प्रमुख शिवालयों में भक्तों का तांता लगा रहा। तड़के से ही जलाभिषेक और विशेष पूजा-पाठ का सिलसिला शुरू हो गया था।

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने भी सतर्कता बरती। कांवड़ यात्रियों और स्थानीय श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। जल पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें घाटों और जलमग्न क्षेत्रों में मुस्तैद हैं ताकि कोई अनहोनी न हो। मंदिरों के पास बैरिकेडिंग करवाई गई है और लगातार निगरानी रखी जा रही है।

श्रद्धालुओं का कहना है कि चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थितियां हों, श्रावण मास के सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक किए बिना उनका दिन अधूरा रहता है। भीगते बदन, गीली गलियों और जलमग्न रास्तों के बीच भी शिवभक्तों ने दर्शन और जल चढ़ाने की परंपरा निभाई।

कांवड़ यात्रा के चलते प्रयागराज की सड़कों पर भी रौनक देखने को मिली। हजारों श्रद्धालु दूर-दराज से जल लेकर शहर के प्रमुख शिवालयों में पहुंचे। कई भक्तों ने गंगा और यमुना का जल सिर पर उठाकर मंदिरों तक पहुंचने की कठिन यात्रा पूरी की।

श्रावण मास के इस अंतिम सोमवार को आस्था ने एक बार फिर दिखा दिया कि जब श्रद्धा सच्ची हो, तो कोई भी प्राकृतिक बाधा मनुष्य को रोक नहीं सकती। बाढ़ की स्थिति ने जहां प्रशासन को सतर्क रहने को मजबूर किया, वहीं आम जन ने यह सिद्ध कर दिया कि आस्था कभी डगमगाती नहीं।

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