देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पार्टी अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त तीन नेताओं को तत्काल प्रभाव से छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति द्वारा यह कार्रवाई लंबे समय से पार्टी नेतृत्व को चुनौती देने वाली गतिविधियों के मद्देनजर की गई है।
अनुशासन समिति के अनुसार, कांग्रेस पार्टी एक अनुशासित संगठन है और पार्टी अनुशासन को भंग करने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाएगा। समिति ने स्पष्ट किया कि पार्टी के दिशा-निर्देशों और मूल विचारधारा का पालन करना हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है, और जो भी संगठनात्मक मर्यादाएं लांघेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
क्या हैं आरोप?
तीनों निष्कासित नेताओं में कीरत सिंह रावत (अध्यक्ष, पोखड़ा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी), चतर सिंह रावत (पूर्व अध्यक्ष, खिर्सू ब्लॉक) और सुलेमान अली (पूर्व प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस) शामिल हैं।
1. कीरत सिंह रावत
रावत पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी समर्थित उम्मीदवार के खिलाफ कार्य किया और खुद विपक्षी प्रत्याशी के पक्ष में खड़े होकर पार्टी लाइन का उल्लंघन किया। बताया गया कि उन्होंने नामांकन दाखिल करने के बाद उसे वापस ले लिया और विपक्षी उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार किया। यह न केवल कांग्रेस पार्टी, बल्कि स्थानीय कांग्रेसजनों और समर्थकों की भावनाओं के साथ धोखा माना गया।
2. चतर सिंह रावत
पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष चतर सिंह रावत पर प्रत्यक्ष चुनावी उल्लंघन का आरोप है। वह खुलेआम पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, जो पार्टी अनुशासन के स्पष्ट खिलाफ है। प्रदेश नेतृत्व ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता करार देते हुए कार्रवाई को जरूरी बताया।
3. सुलेमान अली
पूर्व प्रदेश प्रवक्ता सुलेमान अली पर लंबे समय से पार्टी के खिलाफ बयानबाजी और संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। देहरादून महानगर कांग्रेस कमेटी की संस्तुति पर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को मंजूरी दी।
प्रदेश कांग्रेस ने क्या कहा?
प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति के प्रवक्ता ने कहा,
“कांग्रेस एक अनुशासित राजनीतिक दल है, जिसमें संगठन की गरिमा को सर्वोपरि माना जाता है। अनुशासन तोड़ने वालों के लिए पार्टी में कोई स्थान नहीं है। यह कार्रवाई बाकी कार्यकर्ताओं के लिए एक कड़ा संदेश है कि अनुशासन और निष्ठा सर्वोपरि है।”
इस कार्रवाई के बाद संबंधित नेताओं को उनके सभी दायित्वों से मुक्त कर दिया गया है, और अगले छह वर्षों तक पार्टी की किसी गतिविधि में भाग लेने पर रोक रहेगी।
पार्टी की सख्ती का मकसद
कांग्रेस पार्टी ने बीते कुछ समय से प्रदेश स्तर पर संगठन को फिर से मजबूत करने और अनुशासन की नई रीति-नीति लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। संगठन के भीतर बढ़ती गुटबाजी और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को रोकने के लिए सख्त अनुशासनात्मक नीति अपनाई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए कोड ऑफ कंडक्ट को लेकर नई गाइडलाइन भी लागू की जा सकती है, जिससे पार्टी की छवि मजबूत हो और नेताओं की जवाबदेही तय की जा सके।
आगे की प्रक्रिया
पार्टी द्वारा इन तीन नेताओं को निष्कासित करने की सूचना अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) को भी भेजी गई है। यदि कोई नेता इस निर्णय के खिलाफ पार्टी मंच पर अपील करना चाहे, तो उन्हें निर्धारित समय सीमा में पार्टी अनुशासन समिति के समक्ष आवेदन देना होगा।








