---Advertisement---

हरिद्वार की गंगा आरती पर विवाद: जानें बाबा हठयोगी और गंगा सभा में क्यों बढ़ा तनाव

हरिद्वार की पहचान मानी जाने वाली हरकी पैड़ी की गंगा आरती को लेकर संत समाज और गंगा सभा के बीच विवाद छिड़ गया है। बैरागी निर्वाणी अणी अखाड़े के संत **बाबा हठयोगी** के बयान से पुरोहित समाज और गंगा सभा की राजनीति गरमा गई है।

चेतन ज्योति आश्रम में एक कार्यक्रम के दौरान बाबा हठयोगी ने कहा कि हरकी पैड़ी जैसी गंगा आरती शहर के अन्य घाटों पर भी शुरू होनी चाहिए। उनका तर्क था कि इससे हरकी पैड़ी पर भीड़ का दबाव कम होगा और श्रद्धालु अलग-अलग घाटों पर भी आरती का दिव्य अनुभव ले पाएंगे।

बाबा हठयोगी ने हरकी पैड़ी को लेकर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी दस्तावेजों में हरकी पैड़ी को ‘नहर’ के रूप में दर्ज किया गया है। ऐसे में नहर पर गंगा आरती का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हरकी पैड़ी के उत्तर में स्थित घाटों पर गंगा आरती होनी चाहिए क्योंकि यहां श्मशान घाट से अशुद्ध जल बहकर हरकी पैड़ी तक पहुंचता है।

बाबा हठयोगी के इस बयान ने पुरोहित समाज और गंगा सभा को नाराज कर दिया। गंगा सभा के अध्यक्ष **नितिन गौतम** ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संत समाज हमारे पूज्य हैं, लेकिन सनातन परंपरा में यह भी माना गया है कि एक उम्र के बाद व्यक्ति की बुद्धि क्षीण हो जाती है। उन्होंने कहा, *“हमारे समाज में छोटे बच्चों और वृद्धों को एक समान समझा जाता है और उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जाता।”*

गौतम ने आगे कहा कि गंगा का इतिहास पौराणिक और सनातन आस्था से जुड़ा हुआ है। इस पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी या संदेह उचित नहीं है। गंगा सभा ने साफ कहा कि हरकी पैड़ी की आरती की परंपरा अटूट है और इसमें बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है।

Related Post