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सीएम धामी की सख्त चेतावनी: अब देरी नहीं, परिणाम चाहिए—IAS मीटिंग में बड़े निर्देश!

देहरादून । मुख्यमंत्री आवास पर शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में उत्तराखंड के IAS अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण और प्रेरक अनौपचारिक बैठक आयोजित की गई।

प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन (AOC) के संदर्भ में हुई इस बैठक में राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन समेत वरिष्ठ से लेकर युवा तक सभी प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने यहां अधिकारियों को सख्त, स्पष्ट और प्रेरणादायक संदेश देते हुए कहा कि आने वाला समय उत्तराखंड के लिए निर्णायक है और प्रशासन को तेज़, पारदर्शी और परिणाम-आधारित कार्यशैली अपनानी ही होगी।

“ये दशक उत्तराखंड का दशक”—सीएम धामी के निर्देशों में दिखा विज़न

बैठक की शुरुआत में मुख्यमंत्री धामी ने सभी अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह कोई औपचारिक संबोधन नहीं है, बल्कि राज्य की उन्नति के लिए उनके मन की भावनाओं को साझा करने का एक अवसर है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस कथन को याद दिलाया—
“ये दशक उत्तराखंड का दशक है”

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सपने को साकार करना प्रशासन की प्रतिबद्धता, गति और पारदर्शिता पर निर्भर करेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आने वाले पाँच वर्ष राज्य के विकास के लिए ऐतिहासिक होंगे और इसमें प्रत्येक अधिकारी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

“फाइलों में देरी नहीं चलेगी; निर्णय तेज़ और लक्ष्य-आधारित हों”—सीएम का सख्त संदेश

मुख्यमंत्री ने शासन व्यवस्था में देरी और लालफीताशाही पर कड़ा रुख दिखाया। उन्होंने कहा—
“व्यवस्था ऐसी बने कि फाइलें समय पर निपटें और योजनाओं का प्रभाव जमीन पर दिखे।”

उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक अधिकारी अपने-अपने विभाग और क्षेत्रों में मासिक समीक्षा, निरंतर मॉनिटरिंग और फील्ड विज़िट को सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री ने साफ चेतावनी दी कि—
“उदासीनता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनता को कोई शिकायत का मौका नहीं मिलना चाहिए।”

“यह केवल नौकरी नहीं, समाज सेवा का दायित्व है”—मुख्यमंत्री का भावनात्मक संबोधन

मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को उनकी सेवा की मूल भावना याद दिलाई। उन्होंने कहा कि IAS अधिकारी केवल प्रशासन के हिस्से नहीं, बल्कि समाज की अपेक्षाओं और समस्याओं के समाधानकर्ता हैं।

उन्होंने कहा—
“आपके निर्णय लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं। इसलिए संवेदनशीलता, दूरदृष्टि और तथ्यपरक सोच बेहद आवश्यक है।”

उन्होंने यह भी कहा कि जनता की शिकायतें चाहे छोटी हों या बड़ी, वे प्रशासन की छवि को प्रभावित करती हैं। एक छोटी सी लापरवाही भी पूरे सिस्टम पर प्रश्नचिन्ह लगा देती है।

“पद की प्रतिष्ठा कार्यकाल तक, लेकिन कार्यों का सम्मान आजीवन”—सीएम

अपनी बात को और मजबूत करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक इतिहास के प्रेरक उदाहरण दिए—
सूर्यप्रताप सिंह, टी. एन. शेषन, नृपेंद्र मिश्र आदि ऐसे अधिकारी रहे हैं, जिनके कार्य आज भी समाज द्वारा सम्मान के साथ याद किए जाते हैं।

उन्होंने कहा—
“पद अस्थायी है, लेकिन आपकी ईमानदारी, नेतृत्व और किए गए कार्यों का सम्मान जीवनभर बना रहता है।”
उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे अपने पद को केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज सेवा का पवित्र अवसर समझें।

राज्य को अग्रणी राज्यों की पंक्ति में लाने का संकल्प

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के मंत्र के साथ उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि IAS अधिकारी अपनी निष्ठा, मेहनत और दक्षता के साथ इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाते रहेंगे।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने साझा किए अनुभव

बैठक के अंत में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने वर्तमान में चल रहे प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन (AOC) के अनुभव साझा किए और कहा कि ऐसे संवाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बैठक का सार

बैठक के दौरान यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया—

  • प्रशासन को तेज़ और पारदर्शी होना होगा
  • फाइलों का समयबद्ध निस्तारण अनिवार्य
  • जनता के विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता
  • निर्णय लक्ष्य-आधारित और जमीनी परिणामों वाले
  • उदासीनता के लिए जगह नहीं
  • यह दशक उत्तराखंड का दशक बनाने का सामूहिक संकल्प

इस प्रेरक, सख्त और मार्गदर्शक बैठक ने स्पष्ट कर दिया कि उत्तराखंड सरकार प्रशासनिक सुधारों को लेकर बेहद गंभीर है और “विकसित उत्तराखंड” की दिशा में तेज़ी से बढ़ना चाहती है।

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