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“सीजफायर की घोषणा वाशिंगटन से, सुप्रीम कोर्ट में मुख्यमंत्री: बदलती राजनीति का नया अध्याय”

नज़रिया | धर्मपाल धनखड़ पिछले कुछ वर्षों में देश की राजनीति और शासन व्यवस्था में ऐसे कई घटनाक्रम सामने आए हैं, जो पहले कभी देखने को नहीं मिले। वहीं, कई ऐसी परंपराएँ भी हैं, जो कभी लोकतंत्र की रीढ़ मानी जाती थीं, लेकिन अब लगभग विलुप्त होती दिख रही हैं। नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की परंपरा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

आजादी के बाद 1956 में तत्कालीन रेल मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने अरियालुर रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था। यह भारतीय राजनीति में नैतिकता की मिसाल बनी। बाद के वर्षों में यह परंपरा चलती रही और 2017 में रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने लगातार रेल हादसों के बाद नैतिक आधार पर इस्तीफा देकर इसे जीवित रखा। लेकिन इसके बाद केंद्र या राज्यों में किसी भी मंत्री ने, चाहे कितने ही गंभीर आरोप क्यों न लगे हों, नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ना जरूरी नहीं समझा। ऐसा प्रतीत होता है मानो राजनीति से ‘नैतिकता’ ही विदा हो गई हो।

हालांकि नैतिक मूल्यों की गिरावट के बीच देश की राजनीति में कुछ ऐसे घटनाक्रम भी सामने आए हैं, जो बिल्कुल नए हैं। मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। लेकिन युद्धविराम की घोषणा भारत या पाकिस्तान नहीं, बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की। ट्रंप ने दावा किया कि व्यापार रोकने की धमकी देकर उन्होंने दोनों देशों को सीजफायर के लिए मजबूर किया। यह सुनकर पूरा देश हैरान रह गया। हालांकि भारत सरकार आज भी किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को स्वीकार नहीं करती, लेकिन जनता के मन में भ्रम बना हुआ है।

यह भ्रम तब और गहरा गया जब हाल ही में ट्रंप ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा कर दी। टैरिफ, तेल आयात और अरबों डॉलर की खरीद जैसे दावे पहले वाशिंगटन से सामने आए और बाद में भारत सरकार ने डील की पुष्टि की। सवाल यह है कि देश को इतनी अहम जानकारी दिल्ली की बजाय अमेरिका से क्यों मिल रही है?

इसी कड़ी में एक और अभूतपूर्व घटना सामने आई, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं और एसआईआर को लेकर दलीलें दीं। यह पहली बार हुआ जब मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण से जुड़ी शिकायत लेकर कोई मुख्यमंत्री सीधे सर्वोच्च न्यायालय में पेश हुआ। राजनीति में हो रहे ये बदलाव संकेत देते हैं कि देश एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां ‘पहली बार’ होना अब सामान्य होता जा रहा है।

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