प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा है कि दुनिया में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण ऑर्गेनिक और केमिकल-फ्री खाद्य उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में भारत के किसानों के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने का बड़ा अवसर मौजूद है।
प्रधानमंत्री ने “कृषि एवं ग्रामीण परिवर्तन” विषय पर आयोजित पोस्ट बजट वेबिनार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया ऑर्गेनिक डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर बढ़ रही है। इस बदलती मांग के बीच भारत के किसान केमिकल-फ्री और प्राकृतिक खेती के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह किसानों के लिए निर्यात का एक “हाईवे” साबित हो सकता है।
उन्होंने बताया कि सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रमाणन प्रणाली, परीक्षण प्रयोगशालाओं और जरूरी बुनियादी ढांचे के विकास पर काम कर रही है। हालांकि इसके लिए सरकार, वैज्ञानिकों, उद्योग और किसानों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि केवल एक फसल पर निर्भर रहना किसानों के लिए जोखिम भरा होता है। इसी कारण सरकार फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित कर रही है। खाने के तेल और दालों के लिए राष्ट्रीय मिशन तथा प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन जैसे कार्यक्रम कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi के तहत करीब 10 करोड़ किसानों को चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। इसके अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य में सुधार, संस्थागत ऋण की बढ़ती पहुंच और Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana के तहत दावों के भुगतान से किसानों का जोखिम कम हुआ है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज अनाज, दालों और तिलहन का रिकॉर्ड उत्पादन कर रहा है, लेकिन आने वाले समय में उच्च मूल्य वाली फसलों पर भी ध्यान देना होगा। बजट में नारियल, काजू, कोको और चंदन जैसी फसलों को क्षेत्रीय आधार पर बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे निर्यात उन्मुख उत्पादन बढ़ेगा, वैसे-वैसे प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इसके साथ ही पशुपालन क्षेत्र को भी मजबूत करने की जरूरत है, क्योंकि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और अंडा उत्पादन में दूसरे स्थान पर है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्रामीण समृद्धि सरकार की प्राथमिकता है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने वर्ष 2029 तक तीन करोड़ “लखपति दीदी” बनाने का लक्ष्य भी दोहराया और राज्यों से कृषि क्षेत्र में नई तकनीक और बाजारों से किसानों को जोड़ने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।








