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नालूपानी और नलूणा में भूस्खलन से रोकी चारधाम यात्रा, बीआरओ जुटा राहत कार्य में

उत्तरकाशी:  गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे पर एक बार फिर पुराने भूस्खलन क्षेत्र सक्रिय हो गए हैं। नालूपानी और नलूणा के भूस्खलन जोन लगातार यात्रियों के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग नालूपानी में अचानक बंद हो गया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इन कतारों में चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय यात्री भी फंसे रहे।

मार्ग को खोलने के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और दोनों ओर से पोकलेन मशीनें लगाकर मलबा हटाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि लगातार मलबा गिरने से मार्ग को सुचारु करना चुनौती बना हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार मानसून ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों को गहरे घाव दिए हैं। अगस्त महीने में बादल फटने और अतिवृष्टि की घटनाओं ने कई नए लैंडस्लाइड जोन बना दिए, वहीं पुराने निष्क्रिय भूस्खलन क्षेत्र भी सक्रिय हो उठे हैं। यही वजह है कि गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे महत्वपूर्ण हाईवे पर आवागमन बार-बार बाधित हो रहा है।

जानकारों के मुताबिक, पहले जिन क्षेत्रों का ट्रीटमेंट कर भूस्खलन की समस्या पर काबू पाया गया था, वे भी अब दोबारा खतरा बन रहे हैं। नालूपानी और नलूणा जैसे इलाके बार-बार धसकने से न केवल यात्रा प्रभावित हो रही है, बल्कि स्थानीय निवासियों का जीवन भी मुश्किलों में पड़ रहा है।

उधर, आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा है कि जिन नए भूस्खलन जोन का निर्माण अतिवृष्टि और बादल फटने जैसी घटनाओं से हुआ है, उनका विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा। ताकि भविष्य में ऐसे क्षेत्रों को स्थायी रूप से ट्रीटमेंट कर सुरक्षित बनाया जा सके।

चारधाम यात्रा मार्गों की स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, जिससे यात्री और स्थानीय लोग दोनों ही चिंतित हैं। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा पर निकलने से पहले मार्ग की स्थिति की जानकारी अवश्य लें।

 

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