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चारधाम यात्रा 2026: ग्लोबल टेंशन ने रोकी पंजीकरण की रफ्तार!

 अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के कारण यात्रा के शुरुआती पंजीकरण में भारी गिरावट, डैमेज   कंट्रोल शुरू

 प्रशासन ने पंजीकरण प्रक्रिया सरल की, तब भी होटल, होमस्टे और ट्रैवल ऑपरेटरों की   बेचैनी बढ़ी

 पिछले वर्ष शुरुआती 26 दिनों में हुए थे करीब 17 लाख पंजीकरण, इस बार अब तक  11  लाख

 सुबह सूचना ब्यूरो, देहरादून।

चारधाम यात्रा 2026 के आगाज़ से ठीक पहले सामने आ रही रिपोर्टों ने उत्तराखंड के पर्यटन जगत में चिंता की लहर पैदा कर दी है। साल 2026 की इस पावन यात्रा के लिए शुरुआती पंजीकरण के आंकड़ों में पिछले वर्ष के मुकाबले गिरावट दर्ज की गई है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण वर्तमान में जारी वैश्विक तनाव और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता को माना जा रहा है। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव ने न केवल अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं और ईंधन की कीमतों को प्रभावित किया है, बल्कि विदेशी और प्रवासी भारतीय तीर्थयात्रियों के मन में सुरक्षा को लेकर भी संशय पैदा कर दिया है।
आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले वर्ष यात्रा के शुरुआती 26 दिनों में जहां श्रद्धालुओं का आंकड़ा 17 लाख के पार पहुंच गया था, वहीं इस साल अब तक लगभग 11 लाख पंजीकरण ही हुए हैं। इस कमी का सीधा असर चारधाम मार्ग पर स्थित होटल, होमस्टे और ट्रैवल ऑपरेटरों के कारोबार पर दिख रहा है। पर्यटन व्यापारियों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के कारण कई समूहों ने अपनी बुकिंग फिलहाल टाल दी है। इसके अलावा, ईंधन की कीमतों में संभावित उछाल के डर से ट्रैवल एजेंसियां भी लंबी अवधि के पैकेज बुक करने में सावधानी बरत रही हैं।
हालात को देखते हुए उत्तराखंड प्रशासन अब पूरी तरह मुस्तैद है। सरकार ने पंजीकरण प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए नए तकनीकी सुधार किए हैं ताकि घरेलू तीर्थयात्रियों को किसी भी तरह की असुविधा न हो। प्रशासन सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा का भरोसा दिला रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे कपाट खुलने की तारीख नजदीक आएगी, स्थानीय और घरेलू श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी आएगी, जिससे शुरुआती सुस्ती दूर हो जाएगी। फिलहाल, सबकी नजरें वैश्विक हालात पर टिकी हैं, क्योंकि इस यात्रा की सफलता पर ही राज्य की पूरी आर्थिकी टिकी हुई है।

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