पीड़ित परिवारों को दी हरसंभव मदद का भरोसा, पुनर्वास और मुआवजा प्रक्रिया में तेजी के निर्देश
देहरादून/पौड़ी।उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ अपने विधानसभा क्षेत्र श्रीनगर के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पाबौं विकासखंड के सर्वाधिक प्रभावित गांवों – सैंजी, बांकुड़ा, नौठा बाजार और बुरांसी – का दौरा कर ग्रामीणों से मुलाकात की और संवेदना व्यक्त करते हुए राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।
डॉ. रावत ने कहा कि प्रदेश सरकार विपदा की इस घड़ी में पूर्ण रूप से पीड़ितों के साथ खड़ी है और सभी आवश्यक राहत व पुनर्वास कार्यों को पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आपदा में कई आवासीय भवन, दुकानें, गौशालाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं जबकि कई संरचनाएं मलबे में दब गई हैं।
बाधित सुविधाओं को जल्द बहाल करने के निर्देश
क्षेत्र में सड़क, बिजली, पेयजल और संचार सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर बहाल करने के निर्देश प्रशासन को दिए गए हैं। साथ ही चिकित्सा, भोजन और आवश्यक सेवाएं सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
पुनर्वास पर विशेष जोर
डॉ. रावत ने बताया कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और विस्थापन को सरकार ने प्राथमिकता में रखा है। इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी गठित की गई है, जो नुकसान का आंकलन कर शासन को रिपोर्ट सौंपेगी ताकि मुआवजे की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जा सके।
भविष्य की तैयारी और सतर्कता
उन्होंने बताया कि क्षेत्र का भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान से कराया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से सतर्कता बरती जा सके। इसके साथ ही विद्यालयों के संचालन को सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
सीएम धामी का जताया आभार
डॉ. रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने उत्तरकाशी में राहत कार्यों की निगरानी के बाद सीधे श्रीनगर क्षेत्र में पहुंचकर पीड़ितों का दर्द साझा किया। उन्होंने दोहराया कि प्रदेश सरकार दुख की इस घड़ी में हर पीड़ित परिवार के साथ है।
मौके पर उपस्थित रहे:
इस दौरान जिलाधिकारी पौड़ी स्वाति भदौरिया, एसएसपी लोकेश्वर सिंह, अन्य प्रशासनिक अधिकारी व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।








