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बिंदुखत्ता आंदोलन को मिली नई ताकत, 50 कार्यकर्ताओं के साथ ‘वन अधिकार संगठन’ का गठन

हल्द्वानी बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित किए जाने की लंबे समय से चली आ रही मांग को नई दिशा देने के लिए रविवार को आयोजित ‘चाय पर चर्चा’ कार्यक्रम में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। पूर्व सैनिक संगठन, वन अधिकार समिति और विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ पदाधिकारियों व सक्रिय कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में सर्वसम्मति से “वन अधिकार संगठन” नामक नई इकाई का गठन किया गया।

बैठक में कहा गया कि वर्तमान वन अधिकार समिति में केवल 15 सदस्य होने के कारण बिंदुखत्ता के सभी 32 ग्रामों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा था। साथ ही 18 तारीख को आयोजित रैली में शामिल कुछ राजनीतिक दलों को जनता द्वारा अपेक्षित समर्थन नहीं मिला, जिससे आंदोलन की दिशा पर सवाल खड़े हुए। इन परिस्थितियों को देखते हुए व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नई समिति का गठन किया गया है।

नवगठित वन अधिकार संगठन में ग्रामसभा स्तर पर 50 से अधिक जमीनी कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्व ग्राम की मांग को और अधिक मजबूत, संगठित और जनआधारित बनाना है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि अब प्रत्येक ग्राम की आवाज को मंच मिलेगा और आंदोलन अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ेगा।

वन अधिकार समिति के अध्यक्ष अर्जुन नाथ गोस्वामी ने बिंदुखत्ता के निवासियों और मीडिया प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने हालिया आयोजन के दौरान मंच पर हुई अव्यवस्थाओं के लिए खेद जताते हुए कहा कि भविष्य में आंदोलन पूरी तरह अनुशासित और सुव्यवस्थित तरीके से संचालित किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हमने अपनी कमियों को स्वीकार किया है और पूर्व सैनिक संगठन के साथ मिलकर इन्हें दूर करेंगे।”

बैठक में कैप्टन इंद्र सिंह पनेरी, भुवन भट्ट, खिलाफ सिंह दानू, चंचल सिंह कोरंगा, प्रताप सिंह बिष्ट, उमेश भट्ट, बसंत पांडे, भरत नेगी, एडवोकेट बलवंत बिष्ट, श्याम सिंह रावत सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

 

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