देहरादून: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद से विवाह पंजीकरण में अप्रत्याशित वृद्धि देखी जा रही है। पहले जहां उत्तराखंड विवाह पंजीकरण अधिनियम- 2010 के तहत औसतन केवल 67 शादियों का पंजीकरण प्रतिदिन होता था, वहीं अब यूसीसी के तहत यह संख्या बढ़कर 1634 प्रतिदिन पहुंच गई है। इसके परिणामस्वरूप अब तक कुल 3,01,526 विवाह पंजीकरण हो चुके हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है कि लोगों में पंजीकरण के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस वृद्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “समान नागरिक संहिता के तहत विवाह पंजीकरण की संख्या बढ़ रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कानून का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है और समाज में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। यह एक मजबूत और सशक्त समाज की दिशा में एक ठोस कदम है। विशेषकर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए यह कानून महत्वपूर्ण है।”
यूसीसी लागू होने से पहले का स्थिति
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने से पहले, 2010 में लागू विवाह पंजीकरण अधिनियम के तहत शादियों का पंजीकरण होता था, लेकिन उस समय विवाह पंजीकरण की संख्या बहुत कम थी। 2010 से लेकर 26 जनवरी 2025 तक, इस एक्ट के तहत कुल 3,30,064 विवाह पंजीकरण हुए, जो प्रतिदिन औसतन केवल 67 थे। हालांकि, यूसीसी लागू होने के बाद यह संख्या कई गुना बढ़ गई है।
यूसीसी का प्रभाव
27 जनवरी 2025 से उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद से विवाह पंजीकरण में एक बड़ा बदलाव देखा गया है। अब प्रतिदिन औसतन 1634 शादियां पंजीकृत हो रही हैं, जो पिछले कानून की तुलना में कई गुना अधिक है। सरकार द्वारा यह कानून सरल और स्पष्ट प्रक्रिया को बढ़ावा देता है, जिससे लोग विवाह पंजीकरण के लिए अधिक उत्साह दिखा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम विशेष रूप से महिलाओं के हित में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण महिलाओं को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है और उनके अधिकारों की रक्षा करता है।
समय सीमा में विस्तार
समान नागरिक संहिता के तहत विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए, राज्य सरकार ने पंजीकरण की समय सीमा को छह महीने से बढ़ाकर एक वर्ष कर दिया है। विधायी एवं संसदीय कार्य विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है, जिससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो किसी कारणवश अब तक विवाह पंजीकरण नहीं करवा पाए थे।
सरकार की नई पहल
उत्तराखंड सरकार ने विवाह पंजीकरण को और अधिक सरल और सहज बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। अब विवाह के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन भी की जा सकती है, जिससे दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी आसानी से इसका लाभ उठा सकते हैं। सरकार का मानना है कि यह कदम राज्य में सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “विवाह पंजीकरण से न केवल कानूनी सुरक्षा मिलती है, बल्कि यह समाज में महिलाओं के अधिकारों को मजबूती भी देता है। इसके साथ ही, यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण से यह भी सुनिश्चित होता है कि सभी विवाह कानूनी दृष्टि से मान्य होंगे, जिससे भविष्य में किसी प्रकार के कानूनी विवाद से बचा जा सके।”
सरकार के इस कदम से यह भी सुनिश्चित होता है कि भविष्य में विवाह से संबंधित सभी कानूनी मुद्दे आसानी से हल हो सकेंगे, और यह समाज में एक मजबूत कानून व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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