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उत्तराखंड में बड़ा फैसला: अब रोज गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’, जानें पूरी योजना

देहरादून। उत्तराखंड में 14 अप्रैल को संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाई जाएगी। विद्यालयी शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी राजकीय और निजी विद्यालयों में इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश जारी किए हैं।

विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक की ओर से सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कार्यक्रम प्रभावी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हों। इस अवसर पर छात्रों को डॉ. अंबेडकर के जीवन, उनके संघर्ष और भारतीय समाज में उनके अमूल्य योगदान से अवगत कराया जाएगा।

स्कूलों में आयोजित कार्यक्रमों के तहत भाषण, निबंध, वाद-विवाद, पोस्टर निर्माण, नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को सामाजिक समानता, न्याय, मानवाधिकार और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूक किया जाएगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित भी किया जाएगा, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़े।

इस संबंध में राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि अंबेडकर जयंती का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को उनके विचारों और आदर्शों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि जब छात्र-छात्राएं डॉ. अंबेडकर के जीवन संघर्ष और उपलब्धियों को समझेंगे, तो उनमें समाज के प्रति जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच विकसित होगी।

वहीं, शिक्षा मंत्री ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि अब प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों में प्रतिदिन ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य किया गया है। यह निर्णय केंद्र सरकार और यूजीसी के दिशा-निर्देशों के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करना है।

सरकार का मानना है कि इस पहल से विद्यार्थियों में न केवल जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि वे देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी बेहतर ढंग से समझ पाएंगे।

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