पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भारत–बांग्लादेश सीमा के हालात बदलने लगे हैं। बीएसएफ नॉर्थ बंगाल फ्रंटियर के आईजी मुकेश त्यागी के मुताबिक, एसआईआर की घोषणा के बाद से बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक अपने देश वापस लौटने लगे हैं। पिछले वर्ष जहां केवल 47 लोग लौटे थे, वहीं इस वर्ष सिर्फ तीन महीनों में ही 186 लोग बांग्लादेश वापस जा चुके हैं।
आईजी मुकेश त्यागी ने नॉर्थ बंगाल फ्रंटियर में आयोजित बीएसएफ के 61वें स्थापना दिवस समारोह में बताया कि 27 अक्टूबर को एसआईआर लागू होने के बाद रोजाना उत्तर 24 परगना के सीमा इलाकों से लोगों के बांग्लादेश लौटने की घटनाएँ बढ़ गई हैं। कई लोगों ने स्वीकार किया कि वे अवैध रूप से भारत आए थे और रोज़गार की तलाश में यहां रह रहे थे, लेकिन अब एसआईआर की प्रक्रिया के चलते वापस लौटने को मजबूर हैं।
उन्होंने बताया कि सिलिगुड़ी कॉरिडोर यानी संवेदनशील ‘चिकेन नेक’ क्षेत्र में सुरक्षा और मजबूत कर दी गई है। सीमा के करीब 75 प्रतिशत इलाके में अत्याधुनिक फेंसिंग, हाई-टेक कैमरे और अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं। इसके साथ ही बीएसएफ ने पाकिस्तान की खुफिया गतिविधियों को लेकर भी चेतावनी दी है। आईजी ने खुलासा किया कि पाकिस्तान, भारतीय सुरक्षा संबंधी जानकारी जुटाने के लिए PIO नेटवर्क सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बीएसएफ ने इन प्रयासों को लगभग निष्क्रिय कर दिया है।
जवानों को अनजान नंबरों से आने वाली कॉल न उठाने और संदिग्ध व्हाट्सऐप ग्रुप से दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं। बीएसएफ ने ड्रोन, नाइट विजन और बुलेट कैमरों से निगरानी को और मजबूत बनाया है। पकड़े गए व्यक्तियों के डेटा संकलन के लिए ‘फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन बैंकिंग’ भी शुरू की गई है, जिससे दोबारा घुसपैठ करने वालों की पहचान तुरंत हो सके।
पिछले एक वर्ष में बीएसएफ ने लगभग 8.50 करोड़ रुपये मूल्य के नशीले पदार्थ जब्त किए हैं। इसी वर्ष 152 भारतीय नागरिकों और 440 बांग्लादेशी घुसपैठियों सहित 11 अन्य देशों के अवैध प्रवेशकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।








