सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
गुवाहाटी, कल, 9 अक्टूबर को असम-मेघालय सीमा पर धान कटाई को लेकर हुई हिंसक झड़प के बाद आज, शुक्रवार को तनाव कम होने के संकेत मिले हैं। एक कार्बी युवक की मौत और कई लोगों के घायल होने की घटना के बाद दोनों राज्यों के प्रशासन ने नाइट कर्फ्यू को जारी रखा है, जबकि मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने शांति की अपील की है। जांच जारी है, लेकिन कोई नई हिंसा की खबर नहीं।
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने एक बयान में कहा है कि, “लपांगाप क्षेत्र सीमा विवाद का संवेदनशील बिंदु है। हम असम के साथ बातचीत में हैं और समस्या का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों से अपील है कि हिंसा का सहारा न लें, बल्कि आपसी संवाद से मुद्दे सुलझाएं।” उन्होंने कहा कि यदि ग्रामीण सहयोग करें, तो प्रशासन जल्द समाधान निकाल लेगा।
नाइट कर्फ्यू और सुरक्षा: मेघालय के वेस्ट जयंतिया हिल्स जिले के लपांगाप गांव और असम के वेस्ट कार्बी आंगलोंग के तापाट क्षेत्र में नाइट कर्फ्यू (शाम 6 बजे से सुबह 5 बजे तक) जारी है। दोनों राज्यों की पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात कर दिए हैं। डिप्टी सीएम प्रेस्टोन टिनसॉन्ग ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और कोई घातक हथियारों का इस्तेमाल नहीं हुआ।
मेघालय सरकार ने वेस्ट जयंतिया हिल्स की क्षेत्रीय समिति को लपांगाप गांव का दौरा करने का निर्देश दिया है। समिति सीमा विवाद के स्थायी समाधान के लिए असम के समकक्ष के साथ संयुक्त जांच करेगी।
सोशल मीडिया और स्थानीय प्रतिक्रिया: एक्स (पूर्व ट्विटर) पर आज के अपडेट्स में डूर्डर्शन न्यूज मेघालय ने वीडियो शेयर कर बताया कि कोई घातक बल का इस्तेमाल नहीं हुआ। सेंटिनल असम और नॉर्थईस्ट लाइव ने शांति समिति की बैठक का जिक्र किया, जो 6 अक्टूबर को हुई थी लेकिन विफल रही।
घटना का संक्षिप्त विवरण (पुनरावलोकन):कल सुबह लपांगाप (मेघालय) के ग्रामीणों ने विवादित भूमि पर धान कटाई शुरू की, जो पीढ़ियों पुरानी प्रथा है। तापाट (असम) के कार्बी ग्रामीणों ने इसका विरोध किया, जिससे बहस झड़प में बदल गई।
धारदार हथियारों का इस्तेमाल हुआ, लेकिन पुलिस ने किसी घातक फायरिंग की पुष्टि नहीं की। यह घटना 6 अक्टूबर की शांति बैठक के तीन दिन बाद हुई, जिसमें कृषि गतिविधियां रोकने का फैसला लिया गया था। लपांगाप-तापाट ब्लॉक-II के अंतर्गत आता है, जहां भूमि, जंगल और संसाधनों पर दावा है। 2022 के समझौते के बाद 6 क्षेत्र सुलझे, लेकिन बाकी लंबित हैं। जुलाई 2025 में आगजनी की घटना के बाद भी तनाव बढ़ा था। असम के सीमा संरक्षण मंत्री अतुल बोरा ने वार्षिक कार्ययोजना की समीक्षा की है।








