चांडिल/गिरिडीह: भ्रष्टाचार की दलदल से बाहर आने के बजाय सरकारी दफ्तरों में घूसखोरी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कल ही गिरिडीह से एक राजस्व कर्मचारी को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने घूस लेते गिरफ्तार किया, वहीं आज शनिवार को चांडिल से शनि बर्मन नामक एक और ‘भ्रष्टाचार प्रेमी’ को घूस लेते पकड़ा गया है।
यह लगातार हो रही भ्रष्टाचार की घटनाएं यह साफ संकेत देती हैं कि सरकारी तंत्र में सुधार के लिए अभी बहुत लंबा रास्ता तय करना बाकी है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि भ्रष्टाचार रोकने वाली एजेंसियों की सक्रियता के बावजूद भी कुछ कर्मचारी इस कृत्य से बाज नहीं आ रहे।
भ्रष्टाचार का खेल जारी: ‘घूस लेना’ बन गया प्रमोशन का नया तरीका?
सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या बनी हुई है। सरकारी बाबुओं द्वारा घूस लेने की घटनाएं आम होती जा रही हैं। मज़ेदार यह है कि इसे कभी-कभी ‘प्रमोशन का नया तरीका’ तक कहा जाने लगा है। इससे साफ जाहिर होता है कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ईमानदारी महज एक शब्द भर रह गई है।
गिरिडीह और चांडिल की यह ताजा घटनाएं इस बात को पुष्ट करती हैं कि भ्रष्टाचार में प्रतिस्पर्धा तेज होती जा रही है। अब कर्मचारी नंबर वन बनने के लिए भ्रष्टाचार की होड़ में लगे हुए हैं।
गिरिडीह मामला: भ्रष्ट राजस्व कर्मचारी गिरफ्तार
पिछले दिन गिरिडीह में एक राजस्व कर्मचारी को एसीबी ने घूस लेते हुए गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी भ्रष्टाचार के खिलाफ एक ठोस कदम मानी जा रही थी, लेकिन आज चांडिल से आए मामले ने फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या सच में सरकारी तंत्र में सुधार हो पा रहा है?
चांडिल से शनि बर्मन की गिरफ्तारी: भ्रष्टाचार की निरंतरता
चांडिल से गिरफ्तार शनि बर्मन ने यह साबित कर दिया कि भ्रष्टाचार का जाल सरकारी दफ्तरों में कितनी गहराई तक फैला हुआ है। उनकी गिरफ्तारी से यह उम्मीद तो बनी कि अब अधिकारियों की नाक के नीचे ऐसे कृत्य नहीं हो पाएंगे, लेकिन भ्रष्टाचार रुकने का नाम नहीं ले रहा।
सरकारी तंत्र में सुधार नामुमकिन?
सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की सक्रियता बढ़ाई गई है और कई मामलों में आरोपी कर्मचारियों को सजा भी दी गई है। बावजूद इसके, भ्रष्टाचार की यह घटनाएं यह दर्शाती हैं कि सुधार का रास्ता इतना आसान नहीं।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी तंत्र को सुधारना नामुमकिन नहीं, लेकिन फिलहाल इसे बेहद कठिन जरूर माना जा रहा है। वहीं कई बाबू और अधिकारी खुद सुधरने के मूड में नहीं दिखते, जो इस समस्या को और गंभीर बनाता है।
जनता की उम्मीदें और सरकार की जिम्मेदारी
यह समय है जब सरकार को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही, जनता को भी जागरूक होकर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठानी होगी। केवल जांच और गिरफ्तारी ही काफी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के मूल कारणों को समझ कर उनका समाधान करना होगा।








