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“अंगोरा पालन: ग्रामीण रोजगार का नया स्त्रोत”

चंपावत। जनपद में ग्रामीणों की आजीविका को सशक्त करने और कृषकों की आय में वृद्धि के लिए जिलाधिकारी मनीष कुमार ने गुरुवार को गौरलचौड़ स्थित राजकीय अंगोरा शशक प्रजनन प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अंगोरा शशकों की वर्तमान स्थिति, प्रजनन व्यवस्थाओं, साफ-सफाई, जल निकासी और संपूर्ण प्रबंधन प्रणाली का बारीकी से अवलोकन किया।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अंगोरा प्रक्षेत्र के विस्तार और शशकों की संख्या में वृद्धि के लिए वैज्ञानिक और व्यवहारिक परियोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, “यह प्रक्षेत्र न केवल जैव विविधता के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार सृजन और आजीविका का सशक्त साधन भी बन सकता है।” जिलाधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि अंगोरा पालन को एक स्थायी ग्रामीण उद्यम के रूप में विकसित किया जा सकता है, जिससे स्थानीय परिवारों की आय में वृद्धि होगी और इस क्षेत्र के लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

अंगोरा शशकों का पालन, जिनका उत्पादन ऊन के रूप में होता है, एक लाभकारी व्यवसाय साबित हो सकता है। यह न केवल स्थानीय बाजारों में विक्रय के लिए उपलब्ध हो सकता है, बल्कि इसका निर्यात भी किया जा सकता है। जिले में अंगोरा शशकों की बढ़ती संख्या से क्षेत्रीय किसानों और पशुपालकों को लाभ होगा।

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. वसुंधरा गर्ब्याल को निर्देशित किया गया कि वे कृषकों और पशुपालकों को अंगोरा पालन के लाभों के बारे में जागरूक करें और उन्हें प्रशिक्षण व तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करें। जिलाधिकारी ने कहा, “अगर हम अंगोरा पालन को संगठित और योजनाबद्ध तरीके से बढ़ावा दें, तो यह कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर सकता है।”

निरीक्षण के दौरान, जिलाधिकारी ने साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन और जल निकासी व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दिया और संबंधित अधिकारियों को इन व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि अंगोरा पालन के लिए तैयार की गई योजनाओं में पर्यावरणीय सुरक्षा और संपूर्ण प्रबंधन प्रणाली को प्राथमिकता दी जाए।

अंगोरा पालन, जिस पर पहले कभी इतनी ध्यान नहीं दिया गया था, अब ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। अंगोरा शशकों की देखभाल के लिए गांवों में नए कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता होगी, ताकि ग्रामीण इस व्यवसाय में सफलता प्राप्त कर सकें। इसके साथ ही, स्थानीय लोगों को इससे होने वाले लाभ के बारे में जागरूक किया जाएगा।

इस निरीक्षण में जिलाधिकारी के साथ मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. वसुंधरा गर्ब्याल और अन्य संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस पहल के माध्यम से जिला प्रशासन ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और आय के नए स्रोत विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

अंगोरा पालन को लेकर जिले में व्यापक प्रचार-प्रसार करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस व्यवसाय में शामिल हों और इसकी पूरी क्षमता का उपयोग किया जा सके।

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